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चायवाली राजस्थानी औरत की चुदाई- 2

  • द्वारा


Xxx राजस्थान सेक्स स्टोरी में मैंने धंधे की तलाश मारवाड़ से मुंबई आई एक भाभी को उसी के कमरे में कई बार चोदा जब उसका धनी देस यानि राजस्थान गया हुआ था.

दोस्तो, मैं अनुज उसी चायवाली राजस्थानी औरत की चुदाई की कहानी पूरी करने के लिए फिर से हाज़िर हूँ.
कहानी के पहले भाग
मारवाड़ी औरत का सेक्सी बदन
में अब तक आपने पढ़ा था कि मैं चायवाली राजस्थानी औरत के घर पर था और उसके पति की अनुपस्थिति में उसके साथ मजा लेने लगा था.
उसने खुद अपने हाथ से अपनी चोली उतार दी थी.
अन्दर कुछ ना पहना होने की वजह से उसके ख़ूबसूरत और गोरे गोरे दूध मेरे सामने नंगे हो गए थे.
मैं तो उसके दूध देख कर एकदम ऐसे पागल हो गया था मानो कोई ख़ज़ाना हाथ लग गया हो.

अब आगे Xxx राजस्थान सेक्स स्टोरी:

उसके वो गोरे गोरे मम्मों और उस पर भूरे रंग के उसके निप्पल आह … क्या ही बताऊं दोस्तो, सच में क्या मस्त मम्मे थे. ऐसा लग रहा था कि इन्हें कच्चा खा जाऊं.

इतने मुलायम और इतने सुंदर कि जी कर रहा था … बस पीता ही रहूं.
मैंने धीरे से अपनी जुबान बाहर निकाली और उसके एक निप्पल पर रगड़ रगड़ कर मजा लेने लगा.

कुछ ही देर में मैंने उसके निप्पल को लाल कर दिया और धीरे अपने होंठों से बिल्कुल किसी बच्चे की तरह दबा कर चूसने लगा.
वो भी मज़े से अपने चूचे चुसवा रही थी और जोर जोर से सांसें ले रही थी.

मैं भी उसे और गर्म करने के लिए उसके खुले और गोरे पेट पर अपनी जीभ फिराने लगा, उसकी नाभि को कुरेदने लगा.
वो पागल होती जा रही थी और मेरे सर को पकड़कर मुझे नीचे की तरफ़ धकेल रही थी.

मैं समझ गया था कि अब इसकी चूत बहुत ज़्यादा गर्म हो रही है.
मैंने भी बिना देरी किए उसका घाघरा नीचे सरका दिया और अपना हाथ उसकी पैंटी के ऊपर रखकर उसकी चूत को मसलने लगा.

जैसे ही मैंने उसकी चूत को छुआ, तो वो एकदम से पागल हो गयी.
उसने मुझे बोल ही दिया- आंह चाट लो मेरी चूत को … मुझसे अब रहा नहीं जा रहा … आह जल्दी से चाटो इसे!

बस फिर क्या था … मैंने झट से उसकी पैंटी उतार कर उसे पूरी नंगी कर दिया.
जैसे ही मैंने उसकी पैंटी उतारी, उसकी गोरी-चिट्टी चूत मेरे सामने नंगी हो गयी.

उसकी चूत एकदम गोरी और गुलाबी थी और उत्तेजना से कचौरी सी फूल गयी थी.

मुझसे तो रहा नहीं गया और मैंने झट से उसकी चूत की फांकों को अपनी जीभ से चाटना शुरू कर दिया.
पहले तो मैंने उसकी चूत की फांकों को हल्के से चाटा, फिर अपने एक हाथ से उसकी चूत की फांकों को फैलाया और अपनी जीभ उसकी चूत की गहराई में डाल कर घुमाने लगा.

एक अलग ही स्वाद था उसकी चूत का … थोड़ा सा नमकीन, पर एकदम स्वादिष्ट था.
मैं मज़े ले लेकर उसकी चूत को चाटने और खाने लगा.

वो भी अपनी गांड उठा उठा कर अपनी चूत चटवाकर मज़े ले रही थी.

कुछ दस मिनट में मैंने उसकी चूत को चूस चूस कर लाल कर दिया और उसने भी अब अपना पानी छोड़ दिया, जिसे मैंने चूसते चूसते ही पी लिया.

अब वो थोड़ा शांत हो गयी थी.
मगर कुछ ही पल बाद उसने मुझे अपनी तरफ़ खींचा और मुझे बेड पर गिरा कर सीधे मेरी पैंट को नीचे कर दिया.

उसके बाद मानो बिजली सी कौंधी और अगले ही पल मेरी अंडरवियर को भी खींच कर नीचे सरका दिया.
मेरा तना हुआ लंड अभी फन भी नहीं मार पाया था कि उसने लौड़े को सीधे अपने मुँह में भर लिया और जोर जोर से चूसने लगी.

मुझे तो ऐसा लगा कि मैं दो मिनट में ही झड़ जाऊंगा.
मैंने उसे रोकने की कोशिश की. पर वो मेरे लंड को छोड़ ही नहीं रही थी, बस चूसे जा रही थी.

फिर अचानक खुद ही उसने मेरा लंड मुँह से निकाला कर साइड से मेरे ऊपर आ गयी.
अपनी चूत पर मेरा लंड लगा कर सैट किया और धीरे धीरे मेरे लंड के लिए अपनी चूत में रास्ता बना दिया.

वो धीरे धीरे मेरे लौड़े के ऊपर नीचे होने लगी.
मेरी तो हालत ख़राब हो गयी.

एक तो कंडोम भी नहीं पहना था और लंड एकदम मक्खन की तरह अन्दर बाहर हो रहा था.
चमड़ी से चमड़ी की रगड़ बेहद गर्म अनुभूति दे रही थी.
मैं अब अलग ही दुनिया में था.

उसने भी अपनी स्पीड बढ़ा दी और जोर जोर से ऊपर नीचे होने लगी थी, जिस कारण उसके चूचे भी ऊपर नीचे कूद रहे थे.
मैंने उसके चूचों को पकड़ लिया और दबाने लगा.

इससे उसे और जोश आ गया और वो अब मेरे लंड पर मानो किसी जिमनास्ट की तरह कूद रही थी.
मेरा माल निकलने वाला था, तो मैंने उसे खींच कर बिस्तर पर उल्टा लिटाया और उसे कुतिया बना दिया.

वो भी झट से अपनी गांड मेरी तरफ़ करके घोड़ी सी बन गांड हिलाने लगी.
क़सम से दोस्तो, पीछे से उसकी गांड का आकार देखने लायक़ था.
ऐसा लगा, जैसे कोई पोर्न स्टार की गांड हिल रही हो. एकदम गोरी गोरी और एकदम गोल गोल.

मैंने ताव में आकर उसके चूतड़ पर एक तमाचा मारा.
तो वो सिसक उठी और अपने दूध दबाने लगी.

मैंने उसकी गांड को अपने दोनों हाथों से फैलाया और उसकी गांड के छेद पर अपना थूक लगा कर एक उंगली उसकी गांड के छेद में घुसा दी.

उसे थोड़ा सा दर्द हुआ, पर वो कुछ बोली नहीं.
मैं समझ गया कि इसकी गांड अभी किसी ने चोदी नहीं है.

मैंने अपना लंड उसकी चूत पर रखा और अन्दर घुसा दिया.
मैं जोर जोर से चूत चोदने लगा.

उसी समय मैंने अपने दोनों हाथों से उसकी गांड पकड़ ली और एक हाथ की उंगली को उसकी गांड के अन्दर पेल कर घुमाने लगा, साथ ही जोर जोर से उसकी चूत चोदता रहा.

जब मेरा रस निकलने वाला था. तो मैंने उससे कहा- मेरा निकलने वाला है, कहां निकालूँ?
वो झट से सीधी हो गयी और मेरे लंड को अपने मुँह में लेकर जोर जोर से चूसने लगी.

मैं उसके मुँह के अन्दर ही छूट गया.
उसने मेरा सारा पानी गटक लिया और मेरे लंड को चूस कर साफ़ भी कर दिया.

अब हम दोनों भी थक गए थे तो मैं उसके साथ ही पड़ा रहा.

थोड़ी देर बाद उसने मुझसे पूछा- साहब आपको घर नहीं जाना है क्या?
मैंने कहा- अभी नहीं, अभी एक और राउंड बाक़ी है.

कुछ देर बाद मेरा लंड दोबारा खड़ा होने लगा.
वो उठी और वैसे ही नंगी खड़ी हो गयी, मेरे लिए पानी लेकर आयी.
मुझे भी प्यास लगी थी तो मैंने पानी पी लिया.

वो मेरे सामने नंगी खड़ी थी और मैं खटिया पर नंगा बैठा था.
उसे अपने सामने नंगी देख कर मेरा लंड भी फिर से खड़ा हो गया था.

मैंने उसे वैसे ही खड़े खड़े घुमाया और अपनी गोद में बिठा लिया, उसके चूचे दबाने लगा और उन्हें पीने लगा.

फिर मैंने अपना एक हाथ उसकी चूत के ऊपर रख दिया और चूत रगड़ने लगा. साथ ही मैंने एक उंगली उसकी चूत में डाल दी.

वो भी गर्म होने लगी.

मैंने धीरे से उसके कान में कहा- मुझे तुम्हारी गांड के छेद में अपना लंड डालकर तुम्हें चोदना है.
उसने कहा- नहीं साहब, मैंने अभी तक अपनी गांड नहीं मरवायी. बहुत दर्द होता है.

मैंने उसे दिलासा देते हुए कहा- जैसे पहली बार चूत मरवाने पर दर्द होता है, बाद में मज़ा आता है. वैसे ही गांड मरवाने में भी बहुत मजा आता है. मैं एकदम धीरे से करूँगा ताकि तुम्हें दर्द ना हो और तुम्हें मज़ा भी आए.
थोड़ी सी नानुकर करते हुए वो मान गयी.

मैंने उसे दोबारा घोड़ी बनाया.
पहले तो उसकी गांड के छेद को अपनी जीभ से चाट चाट कर उसे गर्म किया और अपने दोनों हाथों से उसकी गांड को फैला कर चौड़ा कर दिया, फिर अपनी जीभ से मैं उसके छेद को चोदने लगा.

वो मजे से अपनी गांड चुसवा रही थी यानि अब वो गांड चुदवाने को तैयार हो गयी थी.

मैंने उससे तेल लाने को कहा तो उसने तेल की बोतल मुझे लाकर पकड़ा दी.
वो फिर से कुतिया बन कर अपनी गांड ऊपर करके हिलाने लगी.

मैंने तेल की बोतल से एक पतली सी धार बना कर टपकाना शुरू की और उसकी गांड के छेद में तेल भर दिया.
गांड में तेल लगा कर मैं अपनी उंगली से छेद को रगड़ने लगा.

उसे भी मज़ा आ रहा था.
मैंने कुछ सोचा और तेल की बोतल उठा कर उसके ढक्कन को ढीला किया और ढक्कन से तेल रिस कर उसकी गांड के छेद में छोड़ना शुरू कर दिया.

फिर गांड के छेद में बोतल का मुँह घुसा दिया, बोतल का मुँह आसानी से गांड में चला गया.
तेल के कारण उसे ज़्यादा दर्द नहीं हो रहा था.

ये देखकर मैंने बोतल हटाई और दो उंगलियां उसकी गांड के छेद में घुसा दीं.
वो आह करके गांड मटकाने लगी और मैं अपनी उंगलियों को आगे पीछे करने लगा.

अब वो भी अपनी गांड आगे पीछे करके मज़ा लेने लगी और कहने लगी- जल्दी से लंड डाल दो मेरी गांड में.
मैं समझ गया कि ये अब गांड चुदवाने लायक़ हो गयी है.

बिना देरी किए मैंने अपना लंड उसकी गांड के छेद पर सैट किया और धीरे धीरे उसके छेद में घुसाने की कोशिश करने लगा.
मैंने थोड़ा सा धक्का लगाया और मेरे लंड का सुपारा उसकी गांड के अन्दर घुस गया.

उसके मुँह से गहरी आह निकली.
उसे दर्द हो रहा था पर वो कुछ बोली नहीं.

मैंने एक और जोर का धक्का दिया और मेरा आधा लंड उसकी गांड में घुस चुका था.

वो इस बार थोड़ा सा आगे को हुई शायद उसे दर्द ज्यादा हो रहा था.
पर मैंने उसकी गांड को जोर से पकड़ कर रखा था तो लंड बाहर नहीं निकला.

मैंने अब एक आखिरी शॉट मारा और अपना पूरा लंड उसकी गांड में उतार दिया.

उसकी तो मानो गांड फ़ट सी गयी, पर उसने अपना मुँह को तकिए दबा कर रखा ताकि आवाज़ बाहर ना जाए.
मैंने उससे कहा- बस अब दर्द नहीं होगा.

मैंने और थोड़ा सा तेल उसकी गांड पर डाला जहां मेरा लंड उसकी गांड के अन्दर था.
अब उसकी गांड खुल चुकी थी तो मैंने अपना लंड बाहर निकाला और फिर एक ही बार में अन्दर पेल दिया.

तेल होने की वजह से लंड आराम से अन्दर चला गया और अब उसे भी दर्द नहीं हो रहा था.
मैंने लंड को आगे पीछे करना शुरू किया और उसे भी मज़ा आने लगा.

वो अपनी गांड आगे पीछे करने लगी तो मैंने भी अपनी स्पीड बढ़ा दी.
मेरी जांघें और उसकी गांड आपस में टकरा रही थीं और थप थप की आवाज़ पूरे कमरे के अन्दर गूंज रही थी.

हम दोनों भी चुदाई का भरपूर आनन्द ले रहे थे.
क़रीब दस मिनट तक उसकी गांड मारने के बाद मैंने अपना माल उसकी गांड में ही छोड़ दिया और अपना लंड उसकी गांड में ही रखकर उसके ऊपर गिर गया.

हम दोनों ऐसे ही थोड़ी देर पड़े रहे.
थोड़ी देर में ही मेरा लंड उसकी गांड से निकल आया और पानी उसकी गांड से निकल कर टपकने लगा था.

वो उठी और उसने अपने आपको साफ़ किया, अपने कपड़े पहन लिए.
मैंने भी अपने कपड़े पहन लिए.

उसने कहा- साहब, अब आप जाइए अगर किसी ने देख लिया तो दिक़्क़त हो जाएगी.
मैं उसके पास गया और उसके होंठों पर एक किस करके बाहर जाने लगा.

उसने जाते जाते मुझसे कहा- म्हारे भरतार अभी चार दिन घर पर नहीं आने वाले!
मैं उसकी बात को समझ गया और उसको एक प्यारी सी मुस्कान देकर वहां से चला गया.

अगले चार दिन तक मैं हर रात उसके घर जाकर Xxx राजस्थान सेक्स का मजा लेता रहा.
मैंने हर रोज अलग अलग तरीक़े से उसके साथ चुदाई की, जिसमें हम दोनों को बहुत मज़ा आया.

दोस्तो, आपको मेरी Xxx राजस्थान सेक्स स्टोरी कैसी लगी. प्लीज़ मेल और कमेंट ज़रूर करना.
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