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पड़ोसन की चिकनी चूत का भोग लगाया

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Xxx मराठी भाभी सेक्स कहानी मेरी पड़ोसन की चूत चुदाई की है. मेरी बीवी मायके गयी तो मेरी पड़ोसन मेरे लिए खाना लाई पर मैंने उसकी चिकनी चूत का भोग लगाया।

मेरा नाम गणेश है और मैं पुणे का रहने वाला हूं। मैं एक मल्टीनेशनल कंपनी में जॉब करता हूं।

मैं पिछले 11 साल से अन्तर्वासना सेक्स स्टोरीज का पाठक हूं और हर दिन इसकी मस्त सेक्स कहानी पढ़ते हुए मजा लेता हूं।

यह मेरी रियल स्टोरी है जो मैं आपके साथ शेयर कर रहा हूं।
आशा करता हूं कि आपको ये स्टोरी पसंद आएगी।

अपनी Xxx मराठी भाभी सेक्स कहानी शुरू करने से पहले मैं आपको अपने बारे में बता देता हूं।

मेरी उम्र 28 साल है और मेरी हाइट 5.6 फीट है। मेरा लंड 6 इंच लम्बा है और 2.5 इंच मोटा है।
दोस्तो, मैं इतना तो कह सकता हूं कि मेरा लंड किसी भी औरत को संतुष्ट कर सकता है।

मेरे घर में मैं और मेरी बीवी रहते हैं। मेरा अभी कोई बच्चा नहीं हुआ है।

मैं चुदाई में बहुत अच्छा परफॉर्म करता हूं और मेरा वीर्य भी बहुत गाढ़ा है। चूंकि मैं काफी समय से अन्तर्वासना से जुड़ा हूं तो मेरे अंदर चुदाई की प्यास तो हमेशा ही लगी रहती है।
मेरी इस प्यास के कारण मैंने अपनी पड़ोसन की चुदाई कर डाली जिसकी ये कहानी है।

हमारी सोसायटी भी काफी बड़ी है।
मेरे पड़ोस में प्रतीक्षा नाम की मराठी भाभी रहती थी। उसकी उम्र 35 साल के करीब थी।
चूंकि उन दिनों वर्क फ्रॉम होम ही चल रहा था तो मैं घर पर ही रहता था।

तो जिस औरत की मैं बात कर रहा हूं वो देखने में बहुत सुंदर थी।
मेरे घर के सामने ही उनका घर था।

उसके पति एक बड़े बिजनेसमैन थे जिनका भारत से बाहर भी आना-जाना लगा रहता था।

जहां तक मैंने नोटिस किया था, मैं उसके पति को महीने में बस 4 या 5 दिन ही घर में देख पाता था।
इसके अलावा वो काम के सिलसिल में घर से बाहर ही रहते थे।
पड़ोसी होने के चलते उनके घर में हमारा भी आना जाना होता था।

एक बार की बात है कि मेरी बीवी को त्यौहार पर अपने मायके जाना था।
प्रतीक्षा मेरी बीवी की अच्छी दोस्त थी तो मेरी बीवी उसको मेरे खाने की जिम्मेदारी देकर चली गई।
तो उस दिन वो खाना लेकर आई।

उस वक्त मैं हॉल में बैठा हुआ टीवी देख रहा था।

वो खाना रखने लगी तो मुझे उसके गाउन में से उसके बूब्स की झलक मिल गई।
उसने भी मुझे देख लिया कि मैं उसके बूब्स को ताड़ रहा हूं।

खाना रखकर वो मुस्कराती हुई वापस चली गई।
मेरे मन में लड्डू फूटने लगे।

मैं उसकी चूत की फिराक में बहुत दिनों से था।
अब मेरी मुराद शायद पूरी होने को थी।

चूंकि मैं समझ गया था कि बीवी के आने से पहले मुझे इसकी चूत मारनी होगी तो मैंने अपनी तैयारी शुरू कर दी।

मैंने अपनी झांटों का जंगल साफ कर लिया।
मैं चूत भी बिना बालों वाली ही पसंद करता हूं क्योंकि उसको चूसने में बहुत मजा आता है।

अगले दिन मेरी छुट्टी थी और मुझे कुछ काम नहीं था तो मैं कच्छे में पड़ा हुआ ही टीवी देख रहा था।

फिर घण्टी बजी और मैंने तौलिया लपेट कर दरवाजा खोला।
सामने प्रतीक्षा खड़ी थी, वो बोली- खाना खा लो गणेश!
मैंने कहा- हां, आप अंदर रख दीजिए प्लीज।

वो अंदर आने लगी और मैं उसके पीछे पीछे आ गया।

फिर वो रसोई में गई और मेरे लिए पानी का गिलास लाने लगी।

मैं भी हाथ धोकर आ रहा था और तौलिया से पौंछते हुए मेरा तौलिया खुलकर नीचे गिर गया।
वो मेरे सामने ही थी और उसने मुझे फ्रेंची में देख लिया और जोर जोर से हंसने लगी।

मैंने भी थोड़ी शर्मिंदगी के साथ मुस्कराते हुए अपना तौलिया संभाला और फिर लपेटने लगा।
वो हंसते हुए बोली- तुम अपना लंगोटा संभालो, खाना मैं परोस देती हूं।

प्रतीक्षा मेरे लिए खाना लगाने लगी।

मेरे अंदर हवस पहले से ही जागी हुई थी।
मैंने सोचा कि आज इसकी चूत मारने की ट्राई करता हूं वरना फिर तो बीवी लौट आएगी और मौका नहीं मिलेगा।

मैं बोला- आप मेरे लिए थोड़े चावल भी बना सकते हो क्या?
वो बोली- ठीक है, बना देती हूं।
फिर वो रसोई में गई और चावल बनाने लगी।

मौका देख मैं भी किचन में गया और उसके आस पास कुछ ढूंढने का नाटक करते हुए उसकी गांड पर लंड को टच करवाने लगा।
वो भी पलट कर मेरे तौलिये की ओर देख रही थी और फिर से नजर घुमा लेती थी।

मैं जानता था कि संभोग की प्यास तो उसके अंदर भी जरूर लगी होगी।

तभी मैंने पूछा- भाईसाहब कहीं गए हुए हैं क्या? बहुत दिन से दिखाई नहीं दे रहे।
वो उदास मन से बोली- उनका तो होना न होना बराबर है, मेरे लिए तो वो होकर भी नहीं हैं, अपने काम से ही फुरसत नहीं है उनको!

ये सुनकर मैं उसके पास चला गया और उसके कंधे को सहलाते हुए बोला- कोई बात नहीं, ये भी तो आपका ही घर है, जब मन हो आकर ले लेना।

वो बोली- क्या मतलब? क्या ले लेना?
मैंने कहा- व व वो … मेरा मतलब, जब मन करे आकर मन बहला लिया करो।
फिर वो हंसकर बोली- आपके पास कोई खिलौना है क्या जिससे मेरा मन बहला दोगे आप? और मैं क्या छोटी बच्ची हूं?

फिर मैंने उसकी गांड पर लंड छुआते हुए कहा- खिलौना तो है अगर आप खेलना चाहें तो?
उसको अपनी गांड पर मेरे खड़े लंड का अहसास हुआ तो वो थोड़ी आगे सरक गई।

वो बोली- आप अपनी बीवी की गैरमौजूदगी में शरारती हो गए हैं। आप इंतजार करो, मैं चावल लेकर आती हूं।
मैंने फिर नमक उठाने के बहाने पूरा लंड उसकी गांड की दरार में फंसा दिया और उसकी कमर को सहला दिया।

वो एकदम से सिहर गई और उसने पीछे सरकते हुए अपनी गांड को मेरे लंड पर रगड़ दिया।
मैंने सोचा कि यही पल है, अब नहीं किया तो फिर नहीं हो पाएगा।

मैंने हिम्मत की और उसकी कमर में हाथ डालकर उसकी गांड पर लंड को सटाते हुए उसकी गर्दन पर चूमने लगा।

वो बोली- क्या कर रहे हैं, किसी ने देख लिया तो?
मैंने कहा- कोई नहीं आने वाला … अंदर से कुंडी बंद है।

बस फिर तो मैंने उसकी चूचियों पर हाथ ले जाकर उनको गाउन के ऊपर से ही दबाना शुरू कर दिया और वो भी आहें भरने लगी।
फिर मैंने उसे पलटाया और उसके होंठों पर होंठों को सटा दिया।

हम दोनों एक दूसरे को वहीं पर चूमने चाटने लगे।

मैंने उसे रसोई की स्लैब के साथ सटा लिया और उसकी गर्दन और होंठों को चूमने लगा।
वो भी एक हाथ से मेरे लंड को तौलिये के ऊपर से सहलाने लगी।

मैंने तौलिया वहीं पर खोल दिया और उसका हाथ अपने अंडरवियर पर रखवा दिया।
मेरा लौड़ा उफन रहा था और एकदम लोहे जैसा तपने लगा था।

वो मेरे लंड को सहलाने लगी और मैं उसकी चूचियों को दोनों हाथों से दबाते हुए उसके गले को चूम रहा था।

फिर से हम दोनों किस करने लगे और पांच मिनट तक करते रहे।

मैंने उसे बेडरूम में चलने के लिए कहा।
वो बोली- तुम्हारा खाना?

मैंने कहा- जब सामने बिरयानी हो तो दाल-रोटी की किसे पड़ी है?
वो हंसने लगी और मैंने उसे गोद में उठा लिया।

मैं प्रतीक्षा को बेडरूम में ले गया और जाकर उसको लिटा दिया।

अब मैं उसके ऊपर आ गया और उसका गाउन निकलवा दिया।
नीचे उसने ब्लैक ब्रा-पैंटी पहनी थी।

मैं ब्रा के ऊपर से ही उसके बूब्स को मुंह में लेकर चूसने लगा।
कुछ ही देर में मेरी लार से उसकी ब्रा गीली हो गई।
उसके निप्पलों को मैंने ब्रा के ऊपर से ही चूस लिया था जिससे वो मटर के दाने जैसे बाहर निकलकर दिखने लगे थे।

इस रूप में वो बहुत ही सेक्सी लग रही थी।

फिर मैंने उसकी ब्रा निकलवा दी और उसके 34 के बूब्स को नंगे करके पीने लगा।
वो आह्ह … उम्म … करके सिसकारने लगी; मेरे बालों को सहलाने लगी।

उसके मोटे मोटे दूध बहुत ही मस्त स्वाद दे रहे थे।
मैं बूब्स को भींच भींचकर उनका दूध निकाल रहा था और वो मचल जाती थी।

कई मिनट तक मैंने उसकी चूचियों को पीया और दबाया।

अब मैं उसके पेट पर किस करते हुए नीचे की ओर चला और उसकी पैंटी को उतारने लगा।
उसने हाथ से चूत को छुपा लिया तो मैंने उसके हाथ हटवा दिए।

उसकी बिना बालों वाली चूत के दर्शन मुझे हो गए और मैं उसकी मस्त चूत को देखता ही रह गया।

प्रतीक्षा की चूत की फाड़ें बहुत सेक्सी थीं और फूल सी गई थीं। उनमें से हल्का हल्का गीला सा पदार्थ भी बाहर चमक रहा था।
मैंने अपनी जीभ निकाली और गीले पदार्थ को चाट लिया।

मेरी जीभ लगते ही उसकी चूत फड़क उठी और मैंने उसको एकदम से मुंह में भरकर खाना शुरू कर दिया।
मैं तेजी से उसकी चूत को चूसने और काटने लगा।

वो मदहोश होने लगी।
कुछ ही देर में वो अपने सिर को बेड पर इधर-उधर पटकने लगी।
उसकी चूत की आग अब पूरी तरह से भड़क उठी थी।

अब मैंने उसकी चूत में उंगली से भी चोदना शुरू कर दिया।
मेरी पड़ोसन की चूत पर मैं दोहरी मार कर रहा था।

अगले दो मिनट में ही उसकी चूत से रस का फव्वारा निकल पड़ा।
चूत के रस में मेरा पूरा मुंह गीला हो गया।
अपनी पड़ोसन की सेक्सी चूत का मैं सारा नमकीन रस पी गया।

चूत का पानी निकलने के बाद वो थोड़ी शांत हो गई।

फिर उसने मेरे टीशर्ट को निकाला और मुझे पूरा नंगा कर लिया।

उसने मुझे लेटाया और फिर मेरे लंड को चूसने लगी।
मैं जन्नत की सैर करने लगा।
वो बहुत चाव से मेरे लंड को चूस रही थी।
शायद बहुत दिनों से उसको लंड का स्वाद नहीं मिला था।

फिर हम 69 की पोजीशन में आ गए और मैंने अपनी जीभ उसकी चूत में दे दी।
हम दोनों एक दूसरे को मजा देने लगे।

अब मैं उसको चोद देना चाहता था इसलिए मैंने उसको पीठ के बल लिटाया और लंड को उसकी चूत पर फिराने लगा।
वो खुद ही चोदने के लिए कहने लगी।

मैंने उसकी चूत में लंड को एक धक्के के साथ अंदर घुसा दिया और उसकी आंखें फैल गईं।
उसने रुकने का इशारा किया और दर्द में आह आह करने लगी।
मैं रुक गया और उसके इशारा करने तक रुका ही रहा।

कुछ पल के बाद उसने फिर से इशारा किया और मैंने लंड को और अंदर सरका दिया।
अब धीरे धीरे करके मैं लंड को चूत में चलाने लगा और उसने मेरा पूरा लंड अंदर ले लिया।

अब मैंने अपनी पड़ोसन की चूत चुदाई शुरू कर दी।
उसको भी कुछ देर के बाद मजा आने लगा और हम दोनों ही चुदाई के मजे में खो गए।
अब वो मेरा पूरा साथ देने लगी।

फिर मैंने उसको घोड़ी बना लिया और पीछे से उसकी चूत मारने लगा।
हम आधे घंटे तक चुदाई करते रहे।

उस टाइम तक वो 2 बार झड़ चुकी थी।
मैं उसको बेड के किनारे लगाकर चोद रहा था।

अब मेरा भी निकलने वाला था, मैंने पूछा- कहां पर निकालना है?
वो बोली- अंदर ही जाने दो।

मैंने उसकी कमर पकड़ी और दो चार झटके तेजी से मारते हुए उसकी चूत में अपना वीर्य छोड़ दिया।
मेरे वीर्य से उसकी पूरी चूत लबालब भर गई।
मैं बुरी तरह से हांफ रहा था और वो भी हांफ रही थी।

कुछ देर तक हम ऐसे ही पड़े रहे।

थोड़ी देर बाद फिर से उसने मेरे लंड को सहलाना शुरू कर दिया।
फिर उसने मेरे मुर्झाये हुए लंड को मुंह में लेकर चूसना शुरू कर दिया।

मुझे भी मजा आने लगा।
कुछ देर के बाद मेरा लंड फिर से खड़ा हो गया और मैंने एक बार और उसकी चुदाई की।

उसके बाद वो चली गई।

रात को जब वो खाना देने आई तो मैंने रात में भी दो बार उसकी चूत मारी।

इस तरह से मैंने अपनी बीवी के आने से पहले उसको तीन दिन तक चोदा और मेरी सारी इच्छाएं पूरी हो गईं।
वो भी मेरा लंड लेकर खुश हो गई थी और मेरी दीवानी हो गई।

तो दोस्तो, आपको मेरी पड़ोसन Xxx मराठी भाभी की चुदाई की कहानी कैसी लगी मुझे जरूर बताना।
आप लोगों की प्रतिक्रियाओं का मैं इंतजार करूंगा।

इस Xxx मराठी भाभी सेक्स कहानी पर ईमेल और कमेंट्स में अपनी राय जरूर दें। मैं जल्दी ही आपके लिए अपनी पड़ोसन की गांड चुदाई मजेदार सेक्स स्टोरी लेकर आऊंगा।
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