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दो चचेरी बहनों के साथ रंगीन होली

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Xxx होली सेक्स कहानी दो लड़कियों के साथ मस्त होली खेलने की, उसके बाद दोनों की एक साथ थ्रीसम चुदाई की है. मैं घर की छत पर पूरी तैयारी कर रखी थी.

मेरी पिछली कहानी
कामुकता विहीन लड़की का कायाकल्प
में आपने पढ़ा था कि कैसे मैंने दो लड़कियों को जो आपस में चचेरी बहनें थी, चोदा था.
अब इस Xxx होली सेक्स कहानी में पढ़ें कि मैंने उन दोनों को अपने घर की छत पर होली वाले दिन भरी दोपहरी में चोदा.

होली के दिन मैंने पूरी तैयारी कर रखी थी।

अपने पेंट हाउस की छत पर मैंने पूरा टेरेस गार्डन बनाया हुआ है, जिसमें शावर से ले कर 10’X15′ के मिनी स्विमिंग पूल तक की सुविधा है।
चारों तरफ दस दस फुट ऊंची बंबू स्क्रीन लगा कर पूरी प्राइवेसी दी गई है।

होली की तैयारी में एक तरफ बाल्टियों में चुकंदर को उबाल छान कर गहरा बैंगनी रंग, तो सुर्ख गुलाबों से बना लाल रंग, पालक से हरा और कच्ची हल्दी और चन्दन को पीस कर पीला रंग बना हुआ रखा था।

इन्ही चीजों के अर्क निकाल कर पानी में घोलने के बाद बचे हुए पेस्ट को अलग अलग बाउल्स में टेबल्स पर सजाया गया था।
कुल मिला कर सारे रंग ऐसे चीजों के बने थे जो त्वचा को तो फायदा पहुंचाते ही पहुंचाते, साथ साथ मुंह से चाटने चूसने में भी बिलकुल सेफ थे।
क्योंकि बिना ऐसी हरकतों के होली का मज़ा ही क्या। 

दूसरी तरफ मेज़ों पर बड़ी बड़ी प्लेटों में भांग के पकोड़े, भांग की बर्फी, भांग के रस मिले हुए सीरप में रसगुल्ले और जग में भांग की ही ठंडाई रक्खी हुई थी। 

तब तक डोर बैल सुनाई दी।
मैंने दरवाजा खोला और सोनू और पिंकू दोनों को एक साथ ही अपनी बाहों में भर लिया, फिर दोनों के दोनों कपोलों और होंठों को चूमते हुए होली की बधाई दी।
“लकी तुम्हारा होली का तोहफा हम दोनों की तरफ से!” चमचमाती हुई सॉलिड चांदी की पिचकारी मुझे थमाते हुए पिंकू बोली।

मैंने भी उनके लिए खास तौर से लाये हुए डिल्डो उन्हें दिये। 

“अब चलो पिचकारी का ट्रायल लेते हैं!” मैंने कहा- लेकिन होली का मज़ा सफ़ेद कपड़ों में ही आता है। चलो जल्दी से पहन लो। मैंने खास होली के लिए ही मँगवा रक्खे हैं।
दोनों होली के मूड में हँसती हुईं चेंज करने चली गई।

कपड़े बदल कर हम लोग टेरेस गार्डन में आ गए।

वहाँ की तैयारी देख कर तो दोनों हक्की बक्की रह गईं।

मैंने मुट्ठी में पालक का पेस्ट ले कर सोनू के गालों पर मलते हुए नारा लगाया हैप्पी होली!!!
और दूसरे हाथ से गुलाब का पेस्ट ले कर पिंकू के गालों पर मल दिया।

फिर क्या था, वो दोनों भी मेरे ऊपर टूट पड़ीं।
हम तीनों ही आपस में गुत्थमगुत्था हो रहे थे।

मैंने कुर्ती में हाथ डाल कर उनकी चूचियाँ रंगीन कर डालीं, उनकी चूतें भी अछूती नहीं रहीं।

उन दोनों ने भी मेरे पजामे में हाथ डाल कर मेरी बाल्स और पेनिस को खूब मसला और आपस में एक दूसरे की चूचियों और चूतों को रंग से सराबोर कर दिया।
काफी देर ऐसे ही रंगीन कीचड़ में कुश्ती लड़ने के बाद हम लोग अलग अलग हुए।

मैंने म्यूजिक सिस्टम पर होली के गाने चला दिये और वो दोनों उन पर थिरकने लगीं।

“पहले कुछ पेट पूजा कर लेते हैं!” मैंने बोला और एक एक भांग का पकौड़ा उनके मुंह में डाल दिया।

कुछ देर थोड़ा बहुत स्नैक्स लेने के बाद मैंने गिलासों में ठंडाई उड़ेली, जिसे वो दोनों एक सांस में चढ़ा गईं।
मुझे एक आइडिया आया।

मैंने सोनू के माथे पर धार बना कर ठंडाई गिरानी और उसे चाट चाट कर पीनी शुरू करी।
काफी कुछ ठंडाई इधर उधर गिर कर वेस्ट हो रही थी तो पिंकू सोनू के दूसरे गाल पर पिल पड़ी.
इस तरह हम दोनों देर तक ठंडाई के साथ साथ सोनू के गालों और होंठों का भी लुत्फ लेते रहे।

बीच बीच में मेरी और पिंकू की कभी जीभ आपस में टकरा जातीं तो कभी होंठ!
भांग का नशा अब चढ़ने लगा था।

अब दोनों के पैर औटोमेटिक थिरक रहे थे।
उन दोनों ने पूरी मस्ती में झूम झूम कर डांस करना शुरू कर दिया। 

मेरा डांस में कोई इंटरेस्ट नहीं है, सच पूछो तो मुझे डांस आता भी नहीं है।
इसलिए मैं बैठा बैठा नई चांदी की पिचकारी का ट्रायल लेने लगा।
पिचकारी भर भर कर मैंने उन दोनों की चूचियों और चूतों को निशाना बनाना शुरू करा।

थोड़ी देर बाद एकाएक सोनू की एक चूची अचानक कुर्ती को चीरती हुई बाहर आकर फुदकने लगी।
उसने अकबका कर अपनी चूची अपने हाथों से ढाँपने की कोशिश करी तो सामने का पूरा कपड़ा हाथ में आ गया और दोनों बोबे पूरी शान से बाहर आ कर झूलने लगे।

सोनू जब तक कुछ समझती, मैंने चुकंदर के रस से भरी बाल्टी उसके ऊपर उलट दी।
पानी के साथ साथ उसकी पूरी ड्रेस बह कर नीचे ज़मीन पर आ गई और उसकी रंगीन चूचियों और चूत ने अपनी छटा बिखेरनी शुरू कर दी।

पिंकू ने अब ताड़ने वाले अंदाज में मुझे देखा लेकिन उसे कुछ बोलने का मौका दिये बगैर मैंने उसके होंठों से अपने होंठ सिल दिए और उसे गोद में उठा कर मिनी स्विमिंग पूल में छलांग मार दी।

मैं पहले ही जिक्र कर चुका हूं कि पिंकू का वजन बिल्कुल फूल की तरह हल्का है और पानी में तो भार वैसे ही काम हो जाता है।
खैर वहाँ जाकर तो जो होना था, वही हुआ।

मैं उसे अपने बदन से लिपटा कर पानी में अठखेलियां करते हुए उसके अधरों का रसपान कर रहा था, और हम दोनों के ही कपड़े घुल घुल कर पानी में तैर रहे थे।

मैं उसे उसी नग्न अवस्था में गोद में उठा कर सीने से चिपकाए चिपकाए ही बाहर आया और सोनू के बगल में खड़ा कर दिया।

“यह क्या हरकत है?” बनावटी गुस्से से पिंकू बोली.
तो मैंने हँसते हुए उसे चूम कर बात खत्म कर दी।

असल में मैंने वो ड्रेसेज़ पानी में घुलने वाले कपड़े की ही बनवाई थी।

हमें तो वैसे भी एक दूसरे के साथ बिना कपड़ों के रहने की आदत थी लेकिन इस खेल के सरप्राइज़ एलिमेंट ने भांग के सुरूर के साथ मिल कर एक अलग ही उत्तेजक वातावरण बना दिया था।

मैंने उन दोनों की चूचियों से एक साथ ही खेलना शुरू करा; उन्हें गेंदों की तरह उछाला, गोल गोल घुमाया, निप्पलों को मसला और चुटकी में ले कर गोल गोल घुमाया।
फिर मैंने ठंडाई के गिलास से अपने सीने पर धार गिरानी शुरू करी और वो दोनों उसे चाटने और सुड़क सुड़क करके पीने लगीं।

मैं अपने निप्पलों पर धार छोड़ रहा था और वो उन्हें चाट चूस कर ठंडाई के साथ साथ मेरे निप्पलों का भी स्वाद ले रही थी।
आखिर उन दोनों ने मेरे लौड़े का रुख किया और उसको भी चूसना शुरू किया।

पिंकू मेरा लंड चूसती तो सोनू बॉल्स … दोनों पोजिशन बदल बदल कर मेरे लंड और बॉल्स को चूस चूस कर ठंडाई साफ करती रहीं।

मेरा लौड़ा बिल्कुल तन कर खड़ा था और मैं झड़ने को हो रहा था।

मैंने बड़ी मुश्किल से खुद को कंट्रोल किया और पोजिशन बदलते हुए पिंकू को उठा कर टेबल पर पैर लटका के बिठा कर उसकी चूचियों पर रसगुल्लों का भांग मिश्रित रस टपकाना शुरू करा।

मैंने पिंकू की छातियों से बहता रस पीना चालू करा और शर्माती हुई सोनू का मुंह पिंकू की चूत से चिपका दिया।

सोनू ने अपनी जीभ से पिंकू की क्लिट को चाटते हुए रसगुल्लों का रस पीना शुरू करा।

भांग के नशे के कारण उसकी झिझक गायब हो रही थी और वो ज़ोर ज़ोर हँसती हुई पिंकू की क्लिट को होंठों में दबा दबा कर चूस रही थी, जीभ से मसल रही थी और अपनी जीभ उसकी चूत में घुसा कर चारों तरफ घुमा रही थी और साथ ही साथ अपनी खुद की कामकणिका भी मसल रही थी।

मैं शर्मीली सोनू का यह बेबाक रूप देख कर इतना चकित हो गया कि पिंकू की चूचियों की चुसायी भी भूल कर केवल सोनू के काम कौशल को ही निहारने लगा।

“ऊऊ ऊऊई ईई … आअई ईईई उफ फ्फ्फ …” पिंकू की सीत्कारों से मेरा ध्यान वापस लौटा और मैंने जल्दी से एक रसगुल्ला उठा कर पिंकू के मुंह में डाल दिया.
इससे उसकी चीख़ों पर कुछ अंकुश लगा। मैं उसके उरोजों को ज़ोर ज़ोर से भींचते हुए उसे किस करने लगा।

सोनू तो भांग के नशे में ऐसी मस्त थी कि पिंकू की चूत से जोंक की तरह लिपटी हुई थी।
मैं पिंकू के मुंह में एक भांग की बर्फी डाल कर उठा और सोनू के पीछे पालथी मार कर बैठते हुए अपने लंड का उसकी चूत की तरफ निशाना लगाते हुए उसे अपनी गोद में खींच लिया।

मेरा लौड़ा खचाक की आवाज़ के साथ उसकी चूत में पैठता चला गया।
उसके मुंह से एक ज़ोर की ‘उईईई ईईई मर गई!’ की चीख निकली.

लेकिन भांग के नशे में वो ज़ोर ज़ोर से खिलखिला कर हँसती भी रही।

मैंने अपने दोनों हाथों में रंग लेकर उसकी बगलों के नीचे से हाथ सामने ले जा कर उसकी चूचियों को रंगना और मसलना शुरू कर दिया; पीछे से ही मैं उसकी गर्दन, कंधों, कानों और कपोलों को भी चूमने चाटने लगा।

पिंकू अब तक थोड़ा होश में आकर उठी और ज़ोर ज़ोर से हँसते हुए हल्दी के पीले पानी की बाल्टी हम दोनों के ऊपर उलट दी।
सोनू ज़ोर ज़ोर से हँसती हुई अपनी पीठ और दोनों नितंब मेरे बदन से रगड़ रही थी और उठक बैठक करते हुए मेरे लंड से अपनी चूत की खुजली मिटा रही थी।   

ऐसे ही थोड़ी देर आनंद लेने के बाद, मैं सोनू के चूचों को कस के जकड़ते हुए चित लेट गया और सोनू भी मेरे ऊपर उसी पोजीशन में पीठ के बल लंबलेट हो गई।

अब क्या था, पिंकू जो बड़ी देर से सोनू की चूत को ललचाई नज़रों से देख रही थी, 69 की पोजीशन में हम दोनों के ऊपर आ गई और सोनू की चूत से अपना आज का हिसाब चुकता करना शुरू कर दिया।
सोनू मेरे और पिंकू के बीच में सैंडविच बनी हुई थी।
मैं दोनों के बोझ से दबा जा रहा था लेकिन पिंकू की रंगी हुई चूत के दर्शन मेरी थकान दूर कर रहे थे।

वो दोनों एक दूसरी की चूत और क्लिटोरिस पर पराक्रम दिखा रही थीं और मैंने अपना ध्यान पिंकू के चूतड़ों को रंगने में लगाया, मैंने उन्हें अच्छी तरह मसल मसल कर दबा दबा कर रंग लगाया; गांड में उंगली करी, जांघों को सहलाया।

मेरा लण्ड सोनू के चूतड़ों की दरार से बार बार बाहर झाँकने लगता था तो पिंकू ने अपनी जीभ से बीच बीच में उसकी भी खातिरदारी करी। 
अब तक दोपहर चढ़ आई थी।

मैंने उन दोनों को अपने आउटडोर डबल बेड पर बिछायी हुई सफेद बुर्राक चादर पर लेटने को बोला।

वो अपनी रंगे हुए गीले शरीर को देख कर सकुचायीं लेकिन फिर मेरी सनक को चेलेंज न करते हुए एक दूसरे के गले में बाहें डाल कर चित लेट गईं।

मैंने उन्हें जॉइन करते हुए सीधे पिंकू की चूत में अपना लण्ड डाल दिया।
फोरप्ले पहले ही काफी हो चुका था।

धीरे धीरे धक्के मारते हुए मैंने पिंकू के निप्पलों को चुभलाना चालू करा और साथ ही साथ दूसरे हाथ से सोनू की छातियाँ मसलने लगा।

पिंकू ने हाथ बढ़ा कर सोनू को और पास खींचते हुए उसके होंठों को चूसना शुरू कर दिया.
और मैंने भी अपना हाथ उसकी चूचियों से हटा कर उसकी चूत में अंदर बाहर करना चालू कर दिया।

सोनू ने पिंकू का सर अपनी छातियों में भींचते हुए अपनी एक चूची उसके मुंह में दे दी और चूची पर पिंकू के होंठों और चूत में मेरे हाथों का आनंद लेने लगी।

अंत में पिंकू ने ज़ोर की झुरझुरी लेते हुए मुझे अपनी बाहों में कस के भींचा और उई ईई ईई ईए आह्ह्ह की चीख के साथ स्खलित हो गई।

मैंने बड़ी मुश्किल से खुद को झड़ने से रोका और उसके बुरा ना मान जाने के ख्याल से उसके मुंह पर चुंबनों की झड़ी लगाते हुए धीरे से अपना लण्ड बाहर खींच लिया।
आखिर सोनू का भी तो फ़ाइनल चुदाई का हक बनता था।

अब सोनू की मेरे उंगली करने से गीली हो चुकी चूत में मेरा लण्ड आसानी के साथ प्रवेश कर गया।
मैंने उसकी बगलों के बीच से हाथ उसकी पीठ पर ले जाते हुए उसे कस कर आलिंगन में जकड़ा और धीरे धीरे चुम्मियाँ लेते हुए जन्नत की सैर करानी शुरू की।
साथ ही साथ बगल में निढाल लेटी पिंकू की चूचियों और कपोलों का भी जायका लेना जारी रखा।
मैं कभी सोनू के मुंह में जीभ डाल कर मुख चोदन करता तो कभी पिंकू के होंठ चूसता।
कभी वो एक दूसरे के होंठों को चूसने लगतीं तो मैं उनके साइड पोज के गालों को चूमने लगता।
 
आखिर में हम दोनों एक साथ क्लाईमेक्स पर पहुँच कर झड़ गए।

अब हम तीनों अगल बगल लेटे लेटे हाँफने लगे और फिर Xxx होली सेक्स से थक कर नींद के आगोश में चले गए।

जब हमारी आँख खुली तो शाम हो रही थी।

हमने एक साथ शावर लिया और कपड़े पहने।

सफ़ेद चादर पर हमारी रंगीन होली की दास्तान एक एब्सट्रेक्ट पेंटिंग की तरह छप चुकी थी।
“अब इस चादर का क्या करोगे? सारी खराब हो गई.” सोनू ने पूछा।

मैं इसको इस शानदार होली की यादगार के तौर पर सम्हाल कर रखूँगा और जब तुम दोनों आसपास नहीं होगी तो तुम्हें याद करते हुए इस पर लेट कर मुठ मरूँगा।” मैंने मुसकुराते हुए कहा और शाम की चाय का इंतजाम करने चला गया। 

अगली कहानी में मैं ऐसी रंगारंग होली के बाद की उससे भी रंगीन शाम के बारे में बताऊँगा जिसमें सोनू की गांड का भी उद्घाटन हो गया।

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