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खाना बनाने वाली की चुदाई कर डाली- 1

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यह Xxx हिंदी कॉम हॉट कहानी मुझे गाँव में मिली दो भाभियों की है जो शादी में खाना पकाने का काम करती थी. मैंने उन दोनों को चोदना चाह रहा था.

नमस्कार दोस्तो, कैसे हो आप सब!
इस चटपटी वेबसाइट पर आप लोगों का स्वागत है.

मेरा नाम है अंकुर … इस Xxx Hindi Com वेबसाइट पर मैंने पहले भी कई कहानियाँ लिखी हैं।

यह Xxx हिंदी कॉम हॉट कहानी आज से करीब 3 महीना पहले की है.
मई का महीना चल रहा था.

उस वक्त मेरे कजिन ब्रदर सूरज की शादी तय हुई थी.
तो शादी से एक हफ्ता पहले हम लोग गांव चले गए थे.

वैसे अगर आपने मेरी एक अन्य स्टोरी
मेरे चचेरे भाई ने मेरी माँ को चोदा
पढ़ी होगी जिसमें मेरे कजन और मेरे मां के नाजायज रिश्ते के बारे में मैंने बताया था.

तो यह वही कजन है जिसकी शादी तय हुई थी।

आप तो जानते ही हैं शादी वाले घर में बहुत सारे काम होते हैं. सबसे महत्त्वपूर्ण काम है मेहमानों के लिए खाना बनाना!

उसी के लिए हमने घर में दो खाना बनाने वाली को भी रखा था जो हमारे घर में करीब 15 दिन तक रहने वाली थी।
एक औरत का नाम सुधा था जबकि दूसरे का नाम रम्भा था।

सुधा की लंबाई मुझसे थोड़ी सी कम थी यानि वह करीब 5 फुट 4 इंच की होगी.
जबकि रम्भा की लंबाई मेरे बराबर ही थी.

दोनों का ही रंग बहुत ज्यादा साफ नहीं था लेकिन देखने में दोनों की दोनों बहुत सुंदर लगती थी.
उनके नाक नक्श बहुत अच्छे थे.

दोनों ही औरतों की उम्र 30 32 ही होगी.
लेकिन उनकी उम्र के हिसाब से उनका शरीर काफी ज्यादा जवान दिखता था.

सुधा तो देखने में 25-27 साल की लड़की लगती थी जबकि रम्भा का बदन थोड़ा सा भरा पूरा था. उसके चूचे काफी बड़े थे जैसे किसी महिला के होते हैं, ठीक वैसे ही!
जबकि सुधा देखने में किसी कमसिन लड़की की तरह लगती थी.

रम्भा की गांड वाकई में बहुत बड़ी थी, एकदम गोलाकार थी.
जबकि सुधा की आम लड़कियों की तरह ही थी।

क्योंकि गांव के अंदर शादी हो रही थी इसलिए गांव के अंदर अपने घर पर काम करने वालों से थोड़ी दूरी बनाकर रखी जाती है.
उनसे बातचीत वगैरह नहीं की जाती.

लेकिन शहरों के अंदर तो ऐसा नहीं होता.
और मैं शहर से आया था तो मैं उनसे थोड़ा हंस कर बात कर लिया करता था।

उनसे बातचीत करके मुझे यह समझ में आया कि दोनों के पति ही निक्कमे आवारा थे … दारू पीकर पूरे दिन घर में पड़े रहते थे. इसलिए बीवियों को दूसरों के घर पर जाकर खाना बनाने का काम करना पड़ता था.

उनके रहने के लिए हमने अपने घर में ही स्टोर रूम में उनका गद्दा लगवा दिया था, वे दोनों उसी स्टोर रूम में रहती थी।

बात उस रात की है जब मैं पेशाब करने के लिए उठा.
उस समय सुबह के करीब 3:30 बज रहे होंगे.

मैं पेशाब करके जब वापस आया, तब मैंने स्टोर रूम के पास उन दोनों औरतों की आहें भरने की आवाज सुनी।
मैंने अंदर जाने की कोशिश की मगर अंदर से कुंडी लगाई हुई थी तो मैं वहीं पास में खड़ा होकर उनकी आवाज़ सुनने लगा और अपने आंखों को बंद कर कर अपने ख्यालों में सोचने लगा कि ये दोनों औरतें अंदर क्या कर रही होंगी।

अंदर से सुधा की आहों की आवाज बाहर तक आ रही थी.
अब उसकी आहें और तेज हो चुकी थी और मेरा भी पजामा अब जमीन पर गिर चुका था.
मैंने हाथ में अपना लंड ले लिया और उसे हिलाने लगा।

मगर ना जाने कैसे शायद उन्हें यह पता लग गया कि गेट के बाहर कोई है, तो अन्दर से आवाज आनी बंद हो गयी.
मैंने भी तुरंत अपना पजामा ऊपर किया और दौड़ कर उस जगह से दूर चला गया।

अब मेरी आंखों से नींद गायब हो चुकी थी.
मैं बस उन दोनों का ख्याल मेरे दिमाग में घूम रहा था कि वे कमरा बंद करके क्या कर रही होंगी. मैं उनके नंगे बदन को अपने दिमाग की छवि में उतारने लगा और उनको बिना कपड़ों के एक दूसरे में आलिंगन पाते हुए सोचकर अपने लंड को सहलाने लगा।

खैर थोड़ी देर बाद सब लोग जागने लगे और अपने अपने काम में व्यस्त हो गए.

लेकिन अब मेरी दृष्टि उन दोनों औरतों के प्रति पूरी तरीके से बदल गई थी।

थोड़ी देर बाद जब मैं फ्रेश होकर आया तो सुधा ने मुझे चाय दी.
उसका हाथ मेरे हाथ से लगा भर ही था, उतने में ही मेरा लंड एक बार फिर से सुधा को सलामी देने लगा.

मैं बहुत ही अनकंफरटेबल महसूस कर रहा था तो मैंने अपने लंड को ठीक जगह पर किया.
यह करते हुए मुझे रम्भा ने देख लिया था।

हमेशा ऐसा होता था कि मेरे हिस्से में कोई ना कोई मार्केट जाने का काम आ जाता था जिसकी वजह से मैं सबसे अंत में दोपहर का खाना खाता था
लेकिन मेरी सुधा और रम्भा से अच्छी बातचीत हो गई थी तो वे मेरे लिए अलग से ही खाना निकाल कर रख देती थी.

मुझे खाना सुधा ही सर्व करती थी.
मगर उस दिन ना जाने क्या हुआ, मैं मार्केट से करीब दोपहर में 2:30 बजे के करीब आया आपने हाथ पैर धोकर मैं किचन की तरफ गया और देखा कि खाना निकला हुआ है और थोड़ी देर में रम्भा नीचे आई और खाने की प्लेट उसने मेज पर लगा दी।

मैंने रम्भा से पूछा- आज सुधा नहीं आई, क्या बात है?
उसने भी पलट कर अपनी कटीली भाषा में जवाब दिया- सुधा के बिना आपका मन नहीं लगता क्या?

हालांकि उसके इस तरीके के जवाब देने से मैं बिल्कुल हैरान रह गया और मैंने शर्म से अपना सर नीचे झुकाते हुए कहा- नहीं, ऐसी कोई बात नहीं है लेकिन वही मेरे लिए खाना निकालती है तो इसीलिए पूछा.

“आज उसके पति का फोन आ गया है. और मर्दों का तो यह है साहब कि अगर उनसे ज्यादा ढील दे दी तो इधर उधर मुंह मारने लगते हैं।”

उस दिन उसकी बातें मुझे बहुत अजीब लग रही थी.

हमेशा तो वह अपने बदन को पूरे साड़ी और पल्लू के साथ रखती थी लेकिन ना जाने क्यों आज उसका साड़ी का पल्लू थोड़ा सा नीचे की तरफ था जिसकी वजह से उसके विशालकाय गुंबद जैसे दो बबले उसके ब्लाउज से बाहर आने को आतुर हो रहे थे।

मुझे खाना खाते समय फोन चलाते रहने की आदत है मगर उस दिन मेरा ध्यान मेरे फोन से ज्यादा उसके ब्लाउज की तरफ टिका हुआ था.
शायद यही बात रम्भा को भी पता चल रही थी इसलिए अब वह मेरे सामने बैठकर उसने अपने शरीर को टेबल पर थोड़ा आगे की तरफ झुकाया जिससे कि अब मुझे उसके चूचों की गहराई भी दिखने लगी।

वह जानबूझकर मुझे अपना बदन दिखा रही थी.
यह तो मुझे पता चल गया था क्योंकि मेरे काफी पास बैठने के बावजूद मेरे गिलास में पानी डालने के लिए वह बार-बार उठ रही थी, झुक रही थी. जिसकी वजह से उसके बड़े बड़े खरबूजे मेरी आंखों के सामने लटक जा रहे थे।

मेरा लंड तन के तंबू हो गया था।
मैंने अपने लंड को वापस से ठीक किया और आलती पालथी मारकर कुर्सी पर ही बैठ गया।

ऐसा करते हुए उसने मुझे देख लिया था और उसने मुझसे बोला- साहब आप बाकी लोगों की तरह नहीं हो! आप हम लोग को छोटा नहीं समझते हो, हमसे बातचीत कर लेते हो. वरना हम दोनों एक दूसरी से कितनी बातें करेंगी.

उसने कहा- हम समय काटने के लिए बातचीत कर लेती हैं. कभी अपने पतियों से बात कर लेते हैं, कभी गांव शहर की बात कर लेती हैं और बाकी समय में लूडो खेल लेती हैं।

मैंने पूछा- बस इतना ही कुछ करती हो या फिर और कुछ भी करती हो?
तब उसने अपने चेहरे पर शैतानी मुस्कान लपेटे हुए कहा- कभी कभार एक दूसरी के साथ भी खेल लेती हैं।

उसके इस जवाब से तो मेरे गले में चावल ही अटक गया और मैं खांसने लगा.
वह मेरी पीठ पर हाथ फेरने लगी.

उसके चूचे अब मेरे मुंह के बिल्कुल सामने आ गए थे.
ध्यान से देखने पर मुझे यह पता चला कि उसने ब्लाउज के अंदर ब्रा नहीं पहनी है क्योंकि उसके निप्पल भी एकदम टाइट ब्लाउज के बाहर आ रहे थे।

मैंने उससे कहा- अब ठीक है.
तो वह वापस दूर जाकर बैठ गई.

मैंने अपना खाना खत्म किया, वह प्लेट उठाकर जाने लगी.
अब उसकी बहुत बड़ी गांड मेरी आंखों के सामने आ गई थी.

अब सिर्फ रम्भा और उसके बड़े-बड़े चूचे ही मेरी आंखों के सामने बार-बार आ रहे थे.

रम्भा ने अब बर्तन धोने शुरू किया और साथ ही उसने मुझसे कहा- बाल्टी में पानी भर दीजिए।

बैठकर उसने बैठकर साड़ी अपने घुटने तक उठा ली थी और अपने पल्लू को भी अपने कमर में बांध लिया था जिससे अब उसके बड़े बड़े स्तनों के दर्शन मुझे आराम से हो रहे थे और उसकी मांसल जांघें भी मुझे दिखाई दे रही थी.

मैंने धीरे धीरे हैंडपंप चलाया और पानी भरता गया।

जब वो बर्तन धो रही थी तब उसके बड़े बड़े गुंबद तो मानो दाएं बाएं ऊपर नीचे खेल रहे थे.
अब मेरा खुद पर काबू छूट रहा था.

उससे पहले कि मैं वहीं खुले में उसको पकड़ लेता, मैं अपने कमरे में चला गया और उसके बड़े बड़े मोटे चूचों को याद करके अपना लंड हिला कर शांत हो गया।

मेरा पूरा दिन रम्भा के साथ आंख में चोली में ही निकल गया.
जब भी वह मेरे पास आती, मैं बहुत उत्तेजित हो जाता.

अब उसकी आंखों में भी कामवासना साफ नजर आ रही थी.

फिर उसी रात को या फिर कहें कि अगले दिन सुबह मेरी आंख फिर 4:30 बजे के आसपास खुल गई थी.
मैं पेशाब करने के लिए गया और आते वक्त मैंने देखा कि उन दोनों का कमरा खुला हुआ है.

मैंने बहुत ही हल्के हाथों से गेट को थोड़ा सा खोला और अपनी गर्दन को अंदर झांक कर देखा तो पाया सुधा ने ब्लाउज और पेटिकोट पहना हुआ था. उसका पेटीकोट उसके घुटनों के भी ऊपर था.

वह इस तरीके से सोई हुई एकदम मासूम हिरनी लग रही थी मेरा मन तो कर रहा था कि मैं तुरंत जाकर उस पर चढ़ जाऊं!

लेकिन फिर मुझे लगा कि रम्भा कहां है।

मैंने देखा कि बाथरूम की रोशनी जली हुई है.
फिर मुझे समझ में आया कि शायद रम्भा नहाने गई है क्योंकि जब सब लोग उठ जाते थे तो बाथरूम 10 बजे तक खाली नहीं रहता था.
इसलिए रम्भा और सुधा जल्दी उठकर ही नहा लेती थी.

प्रिय पाठको, आपको मेरी इस Xxx हिंदी कॉम हॉट कहानी के अगले भाग में ज्यादा मजा आयेगा.
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