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पड़ोसन भाभी ने चूत गांड का मजा दिया

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सेक्सी भाभी की चुदाई का मजा मैंने अपनी पड़ोस वाली भाभी को चोद कर लिया. मैं उस पर नजर रखता था, उसने मेरे मन की बात भांप ली और खुद से थोड़ी पहल की.

अन्तर्वासना के सभी पाठकों को मेरा नमस्कार!
यह मेरी पहली सेक्स कहानी है. मैं आशा करता हूँ आप सभी को पसंद आएगी.

मेरा नाम विशाल है और मैं दिल्ली से हूँ. मेरी हाईट 5 फुट 7 इंच है और मेरे नन्हे दोस्त की 7 इंच है.

हमारे पड़ोस में एक बेहद खूबसूरत और सेक्सी बदन वाली किरायेदार भाभी रहती थी.
उसकी फिगर और उसके मोटे वक्ष को देखकर किसी का भी लंड सख़्त हो जाए … ऐसा कातिलाना बदन था उसका!
उसको देखकर कोई भी नहीं कह सकता था कि उसका एक बच्चा भी है.
आप भी चौंक गए ना! वो है ही इतनी गदर माल कि क्या क्या तारीफ़ न करूं उसकी.

उस भाभी को देखकर आंखें सेंकने वाले हमारे मोहल्ले में कई लोग थे.
शायद वो भी यह बात जानती थी इसलिए उन्हें रिझाने के लिए वो टाईट पजामा और टी-शर्ट पहनती थी, जिसमें से उसकी गांड और चूचियां बिल्कुल कपड़े फाड़ कर बाहर निकलने को हो जाती थीं.

इस दृश्य का नजारा लेने के लिए अधिकतर नौजवान लोग अपने घर से बाहर निकल आते थे. सब सेक्सी भाभी की चुदाई करना चाहते थे.

एक दिन वो मेरे घर आई.
उस वक़्त भी उसने वही पजामा और टी-शर्ट पहनी हुई थी.

मेरी मां से कुछ देर बात करने के बाद उसने मुझसे पूछा- क्या आप मेरे बेटे को ट्यूशन पढ़ा सकते हो?

अब सामने से ऐसा मौका मिलने पर भला कौन मना करने वाला था, तो मैंने झट से हां बोल दिया.

अगले ही दिन से मैं उसके घर ट्यूशन पढ़ाने जाने लगा.

तब इस बात की जानकारी हुई कि उसका पति कहीं जॉब करता था और अपनी जॉब से काफी देरी से वापस घर आता था.

जैसे उस भाभी के रहने के तरीके थे, उससे लग रहा था कि उसको अपने पति की दिनचर्या के कारण सेक्स भी अच्छे से नहीं मिल रहा होगा.

मैं एक दिन उसके बेटे को पढ़ाने गया हुआ था. उसका बेटा पढ़ाई में बहुत कमजोर था.

उसके घर की घंटी बजाते ही भाभी ने जैसे ही दरवाज़ा खोला, मेरी आंखें पथरा गईं.
उसको उस तरह से देखते ही मेरा लंड मेरी पैंट फाड़ कर बाहर निकलने को हो गया था.

उस वक़्त उसने बिना अंदरूनी वस्त्रों के ही अपनी टी-शर्ट और पजामा पहना हुआ था.
जैसा कि मैंने आपको पहले ही बताया है कि वो कपड़े ज्यादा टाईट पहनती थी. आज भी उसकी चुस्त टी-शर्ट के कारण उसके दूध की घुन्डियां साफ नज़र आ रही थीं.

उसके चूचुक एकदम उस तरह से कड़क हो गए थे, जैसे वो कामवासना में होकर अपने मम्मों के साथ खेल रही थी या अपनी चूत के साथ कुछ हरकत कर रही थी.
साफ़ दिखाई दे रहा था, जैसे उसकी सेक्स की भूख बढ़ चुकी थी.

उसने नशीली आंखों से मुझे देखा और अन्दर बुलाया.
अन्दर आने पर भाभी ने बताया- मेरा बेटा अभी घर पर नहीं है … आप मेरे कमरे में चल कर बैठिये. मैं बस नहाने ही जा रही थी.

ये बात सुनकर मुझे समझ नहीं आया कि ये न्यौता दे रही है या बता रही है.
अब कोई मूर्ख ही होगा, जो इस मौके का फ़ायदा न उठाए.

मैंने मन में सोचा कि कह दूँ कि आप कहें तो मैं साथ में बाथरूम में चलूं. मगर कह नहीं सका.

मैं बस उसके कमरे में जाकर एक कुर्सी पर बैठ गया.

वो कमरे में बने बाथरूम में नहाने चली गई और दरवाज़ा बन्द करना भूल गई या जानबूझकर नहीं किया, ये मैं नहीं समझ पाया.

मैं बस उसको देखने के लिए बेचैन हो गया.
फिर मन नहीं माना तो चुपचाप से बाथरूम के नजदीक चला गया.

वहां का जो नजारा था, उसे शब्दों में बयान करना मुश्किल है.

उसका वो कामुक बदन और उससे स्पर्श खाते हुए गिरता वो पानी, मेरे लंड को और कड़ा बना रहा था.
उसके वो मोटी चूचियां … आह वो सख़्त चूचुक … उसकी वो चिकनी चूत और उसकी वो मुलायम सी दिख रही गांड!

इन सबको देखकर मुझसे अब रहा नहीं गया और मैंने अपने लंड को बाहर निकाल कर सहलाना शुरू कर दिया.
कुछ देर में उसका नहाना खत्म होता देख मैं वहां से जल्दी से निकल लिया और वापिस अपनी जगह पर जा बैठा.

वो अपने उस कामुक शरीर को तौलिये में लपेट कर आई.
अब यह गर्म दृश्य देख कर मेरा लंड मेरे काबू से बाहर होने लगा और एकदम टाईट हो गया.

मैंने अपने फूलते लौड़े को छुपाने की बड़ी कोशिश की लेकिन सफ़ल न हो सका.
उसने मुझे और मेरे उस तैनात दोस्त को देख लिया था.

उसने मेरे लंड पर से मेरा हाथ हटाते हुए और मुस्कुराते हुए कहा- इस बेचारे को क्यों परेशान कर रहे हो?
ये सब होता देख कर मैं चौंक गया, लेकिन इससे मुझे ये बात मालूम हो गई कि उसको लंड की भूख है.

मेरी नज़रें उसके कामुक बदन और खूबसूरत चेहरे से हट नहीं रही थीं.
वो भी मेरी ओर देखती जा रही थी.

अचानक से उसका वो तौलिया उसके शरीर से सरककर नीचे गिर गया और वो अब मेरे सामने बिल्कुल निर्वस्त्र खड़ी थी.

हम दोनों एक दूसरे जो घूरते जा रहे थे. तभी मेरा कदम आगे बढ़ा और उसके तौलिये पर से उलझ कर पैर फिसल गया.
मैं हड़बड़ाहट में उसको अपने साथ लेकर सीधा बिस्तर पर जा गिरा जो दूसरी तरफ लगा हुआ था.

हम दोनों को एक दूसरे की दिल की धड़कन सुनाई दे रही थी.
उसकी चिकनी चूत से मेरा खड़ा लंड रगड़ खा रहा था.

उसने भी ज्यादा वक़्त न लगाया और मेरे होंठों को अपने मुलायम होंठों से मिला लिया.

अब मुझसे भी रूका न गया, मैं भी उसके साथ चूमाचाटी में लग गया.

हम दोनों एक दूसरे की देखते हुए उसी हालत में चुम्बन कर रहे थे.
तभी वो मुझे पकड़ कर घूमी, जिससे वो अब मेरे ऊपर आ गयी.

उसने मेरी होंठों को चूमते हुए अपना एक हाथ नीचे किया और मेरे लंड को मेरे पैंट से बाहर निकाल कर हिलाना शुरू कर दिया.
मैंने भी अपने दोनों हाथों से उसकी मुलायम गांड को अपने हाथों में लेकर दबाना शुरू कर दिया.
हम दोनों को इसमें मजा आ रहा था.

उसने फ़िर धीरे-धीरे नीचे मेरे लंड की ओर जाना शुरू किया.
वो मेरे बड़े लंड को देख कर ऐसे चौंक गई जैसे उसने आज से पहले इतना बड़ा लंड देखा नहीं हो.
उसके चेहरे पर एक हल्की सी बदमाशी वाली मुस्कुराहट आई.

मुझे अपने लंड पर उसकी गर्म सांसें महसूस हो रही थीं जिससे मेरी कामुकता और बढ़ रही थी.

उसने हल्के से मेरे लंड के लाल सुपारे को अपनी जीभ से चाटते हुए लंड चाटने की शुरुआत की और अपने हाथों से मेरे आंड को भी सहलाने लगी.

उसको देख कर लग रहा था, जैसे उसको लंड चूसने में महारथ हासिल हो.

उसकी इस चुसाई के बाद शायद ही कोई भी अपने आपको रोक पाता.

मेरे मन में एक इच्छा जागी कि काश मैं भाभी की मोटी गोल मुलायम चूचियों को चोद सकता.

शायद वो भी इस बात को जल्दी ही समझ गई और उसने अपनी मोटी चूचियों का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया.
उसने मेरे खड़े लंड को पहले अपने चूचुकों पर फेरा, उसके बाद उसने मेरे लंड को अपनी चूचियों के बीच में दबाकर जोर जोर से ऊपर-नीचे करना शुरू कर दिया.

अब मुझे लग रहा था कि मैं अपने आपको और ज्यादा देर नहीं रोक पाऊंगा.
उसकी जोरदार चुसाई और चूचियों की इस मज़ेदार चुदाई के बाद आखिरकार मैं झड़ ही गया.
मेरा सारा वीर्य उसकी उन रसभरी चूचियों पर फैल गया.

उसके बाद उसने मेरे सारे वीर्य को ऐसे चाट लिया जैसे मेरी कोई पालतू कुतिया हो.
उसका ये अंदाज़ मेरे दिल को अच्छा लगा.

अब मेरा मन था कि बस उसकी चिकनी चूत और मोटी गांड चोदने को जल्दी से मिल जाए तो मज़ा आ जाए.

इससे पहले मैं कुछ करता, दरवाजे की घंटी बज उठी.
हम दोनों जल्दी जल्दी से खुद को ठीक करते हुए अलग हुए.

उसने एक बाथरोब पहना और मुझे कमरे में ही रहने का कह कर बाहर जाकर दरवाजा खोल दिया.

उसका बेटा घर आ गया था लेकिन उसकी मां की चूत में जो आग लगी थी, उससे वो काबू के बाहर हो गई थी.

वो अपने बेटे से नहाने की कह कर वापस कमरे में आ गई.

किसी बात को लेकर वो कमरे का दरवाज़ा हल्का सा खोलकर अपने बेटे से बात करने लगी.

ये मेरे लिए एक अच्छा अवसर था. मैंने इस मौके का फ़ायदा उठाया. मैं पीछे से बाथरोब उठा कर उसकी चूत चाटने लगा.

उसकी चूत ऐसे पानी छोड़ रही थी मानो किसी ने नल खुला छोड़ दिया हो.
शायद पकड़े जाने के डर से उसकी कामुकता और बढ़ रही थी इसलिए उसकी चूत इतना पानी छोड़ रही थी.

मैंने उसकी चूत की दोनों फाकों को पकड़ कर उसको चाटना शुरू कर दिया.
मेरी जीभ उसकी चूत के अन्दर तक जा रही थी.

उसने भी मुझे रोकने की कोशिश नहीं की, इससे मुझे पता चल गया कि वो भी आनन्द ले रही है.

मैंने उसके बाद उसकी भगनासा को चाटना शुरू किया. इससे उसकी चूत ऐसे फड़फड़ाने लगी, जैसे वो अभी झड़ जाएगी.
कुछ देर बाद ही वो झड़ गई.

उसकी चूत अब पूरी तरह गीली हो गई थी और चुदने के लिए एकदम तैयार थी.

उसने कुछ बहाना बनाकर अपने बेटे को बाहर से कुछ सामान लाने भेज दिया.
बाजार दूर था तो इसके बेटे को कम से कम आधा घंटा तो पक्का लगने वाला था.

तभी उसके बेटे ने भी कहा- मॉम, मैं देर से आऊंगा. उधर से मुझे अपने दोस्त के घर जाना है.
भाभी ने झट से हामी भर दी.

उसका बेटा चला गया.

उसके जाने के बाद भाभी ने बाहर जाकर दरवाजा लॉक कर दिया और कमरे में वापस आ गई.
आते ही वो एकदम से नंगी हो गई.

अब उस पर जैसे सेक्स का भूत चढ़ गया था.
उसने बिना समय बर्बाद किए मुझे पलंग पर गिराया और मेरे ऊपर आ गई.

फ़िर मेरे लंड को उसने अपनी गीली चूत में डाल लिया और उसने ऊपर नीचे होना शुरू कर दिया.
इस सबसे मेरी कामुकता अपनी चरम पर पहुंच गई.
सेक्सी भाभी की चुदाई शुरू हो गयी.

मैंने उसके मोटी चूचियों को अपने हाथ में पकड़ा और उसके चूचुकों को हल्के से मसलने एवं खींचने लगा.
जितनी तेजी से मैं उसके दूध खींचता, उतनी तेज़ी से वो ऊपर नीचे होने लगती.

वो अब ऐसे ही चुदते हुए मेरी तरफ़ झुकी, जिससे उसकी मोटी चूचियां मेरे चेहरे पर आ गईं.
मैंने भी उनको चूसना शुरू कर दिया. मैं जितनी जोर से चूसता, उसकी सिसकारियां उतनी ही तेज निकलतीं.

उसके चेहरे के हाव भाव से लग रहा था, जैसे उससे ये सब बहुत अच्छा लग रहा हो … और उसके इन्हीं हावभाव के कारण मेरा लंड और सख़्त हो रहा था.

उसकी चूत इतनी टाईट थी, जैसे किसी किशोर वय की लड़की की हो.

उसकी चूत मेरे लंड को मानो जकड़ रही थी. इस जकड़न के कारण मेरी भी सिसकारियां निकलने लगी थीं.
हम दोनों को इसमें मजा आ रहा था. हमारी आवाज़ बाहर न जाए, इसके लिए हम दोनों ने एक दूसरे को चूमना शुरू कर दिया.

मेरे मन में अलग सी खुशी थी क्योंकि उसको चोदने का मेरा सपना आज सच हो रहा था.

कुछ देर बाद हमने पोजिशन बदली.
अब वो नीचे थी और मैं उसके ऊपर!

उसकी चूत में मैं जैसे ही लंड धकेलता, वो मुझे और कसकर पकड़ लेती.
हम ऐसे ही पोजिशन बदलकर सेक्स करते रहे, आख़िर में हम दोनों को परम आनन्द मिल गया.

मेरे लंड को उसने फिर से मुँह में लिया और उसको चूसने लगी.
उसने मेरे लंड पर से सारा वीर्य साफ कर दिया.

उसके बाद हम दोनों ने बाथरूम में जाकर एक दूसरे को साफ किया और साफ़ करते करते हम दोनों वहां पर भी चूमने लगे.

एक दूसरे का ये साथ हम दोनों को अच्छा लगने लगा.
हम दोनों ने आपस में बात करके ठान लिया कि हम अपने इस किस्से के बारे में किसी को नहीं बताएंगे, ये बात सिर्फ़ हम दोनों के बीच रहेगी और हम दोनों सिर्फ़ चुदाई के लिए साथ हैं. उसके अलावा हमारे बीच कुछ नहीं होगा.

इस घटना के बाद हम दोनों कुछ वक़्त निकालकर आपस में मिलते और खूब जमकर चुदाई करते.

मैंने उसके घर का कोई कमरा नहीं छोड़ा … जहां मौका मिलता, हम दोनों लग जाते. कभी रसोई में तो कभी बाथरूम में, कभी बेडरूम में, तो कभी लिविंग रूम में और कभी कभी तो छत पर भी चुदाई करते.

उसको अपने पति से ज्यादा मेरे साथ चुदाई करने में मजा आने लगा था.

लेकिन एक बात थी उसने न अपने पति से न मुझसे अपनी गांड नहीं मरवाई.

मेरे पूछने पर वो बस एक ही बात बोलती कि ये सिर्फ़ किसी खास को ही चोदने को मिलेगी. समय आने पर पता लगेगा कि तुम दोनों में से खास कौन है.

एक दिन उसने मुझे एक पता भेजा और बोला कि इस पते पर मिलना है.

वो एक खाली फ्लैट था, शायद उसकी किसी सहेली का फ्लैट था.
मैं वहां पहुंचा.

उधर वो एक बड़े ही खूबसूरत सी सेक्सी पोशाक में थी.
अपनी उस पोशाक में वो कामुकता की देवी लग रही थी.

मैंने उसे जैसे ही देखा, मुझसे रहा नहीं गया और मैं गोद में उठाकर उसे चूमते हुए सीधा बेडरूम में लेकर गया.

उसको भी मेरा ये पागलपन शायद अच्छा लग रहा था, वो भी इसमें शामिल हो गई थी.

हमने एक दूसरे के होंठों को बड़ी देर तक चूमा और एक दूसरे के साथ खेलने लगे.
हमें समय का पता नहीं चला.

फिर उसने मुझे फिर धकेला और मेरे ऊपर बैठकर बोली- जानेमन, आज तुम्हें मैं जन्नत की सैर कराऊंगी. आज तुम्हें वो मिलेगा, जो तुम काफी वक़्त से चाहते थे.

उसकी कामुक शरीर और पोशाक को देखकर मुझे उसकी ये बातें समझ नहीं आईं.
उसने मेरे लंड को निकलकर उस चूमा और अपनी गांड में हल्के से डालना शुरू किया.

ये देख मुझे इतनी खुशी हुई कि बता नहीं सकता.
मैंने उसकी गांड को जमकर चोदा. मेरा मोटा लंड उसकी गांड में जाते ही उसकी चीखें निकलना शुरू हो गईं.

उसने मुझे बड़ी कसकर पकड़ लिया और मुझे और तेज़ करने को कहने लगी.

मैंने भी उसकी बात को मानते हुए अपनी गति बढ़ा दी.
उसकी चीख निकलना और तेज़ हो रही थी. वो अपने निचले होंठ को अपने दांतों से दबा रही थी.
उसके इस रूप से मैं सच में अब तक वाक़िफ़ ही नहीं था.

मैंने उसको गांड को खूब चोदा और आखिर में उसके अन्दर ही अपना वीर्य छोड़ दिया.
मेरे लंड पर उसकी लगा हुआ उसकी गांड का पानी, उसने चाट कर साफ़ कर दिया.

फ़िर मैं उस उठाकर बाथरूम ले गया और वहां पर भी उसकी खूब जमकर जोरदार चुदाई की.
वो दिन मेरी जिंदगी के यादगार दिनों में से एक है.

इसी के साथ कहानी यहां खत्म करता हूँ.

मैं आशा करता हूँ कि आपको सेक्सी भाभी की चुदाई की कहानी अच्छी लगी होगी.
मुझे अपने विचार मेल करके बताइएगा.
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