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नादान लड़की की उत्कंठा चुदाई से मिटी

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क्यूट गर्ल देसी चुदाई कहानी एक भोली लड़की की है जिसे सेक्स के बारे में कुछ नहीं पता था पर उसकी जिज्ञासा थी कि लड़के लड़की के बीच में कुछ तो होता है.

आजकल सेक्स की काफी घटनाएं कहानी के जरिए सामने आती हैं. आज के जवान लड़के लड़कियां इसे पढ़ने के शौकीन हो गए हैं. सेक्सी साहित्य पढ़ करके काफी मस्त महसूस करते हैं.

कई लोग इसे सामान्य तरीके से लेते हैं और जिंदगी में उतारते भी हैं.
बाकी तो लोगों का अलग अलग सोचने का नजरिया होता है.

यह कुछ ऐसी ही क्यूट गर्ल देसी चुदाई कहानी है जिसमें सेक्स का मजा अलग ही तरीके से बताया गया है.
कुछ टीनएजर, जो जिंदगी को अलग नजरिये से देखते हैं और वैसे ही जीते हैं.

आज की यह कहानी ऐसी ही एक लड़की की है जो सेक्स को काफी पसंद करती है.
यह कहानी बड़ौदा शहर में रहने वाली 19 साल की लड़की की है जिसका नाम भाविका है.

वह दिखने में काफी आकर्षक और गोरी लड़की है, उसका बदन जैसे ऊपर वाले ने बड़ी फुर्सत में बनाया हो.
ऐसी कमनीय काया … जो कोई उसे देखे, तो बस देखता ही रह जाए.

इतनी प्यारी, इतनी मासूम, मोहक आवाज वाली है कि उससे मिलकर कोई भी उस पर फिदा हो जाए.
उसका फ़िगर 34-26-36 का था. रसीले होंठ, तने हुए दूध और पीछे से मटकती गांड वाली मादक हिरणी जैसी चाल वाली लड़की थी.

भाविका सबसे घुल मिल जाती थी. वह अपने परिवार और दोस्तों के साथ अच्छे से संबंध रखती थी.
उसके परिवार में बस भाई और माता पिता थे.

वह पढ़ाई में भी अच्छी थी लेकिन स्कूल में देरी से दाखिल हुई थी.
उसे सेक्स के बारे में कुछ भी ज्ञान नहीं था.

उसका बड़ा भाई दीपेन कॉलेज में पढ़ाई करता था.
उसके पड़ोस में करीबन उसके उम्र की एक लड़की और 3 लड़के रहते थे वह सब भी उसके दोस्त थे.

लड़की पूजा और लड़के वरुण, विनय, विक्रम.
वे लोग साथ खेलते, हंसते बोलते थे.

उनमें से वरुण एक समझदार लड़का था. वह दिख़ने में थोड़ा सांवला था.
विक्रम दिखने में ठीक-ठाक और बर्ताव से मजाकिया था.
विनय कसरती और काफी खूबसूरत था, घुलमिल जाने वाले स्वभाव का था.

पूजा दिखने में ठीक-ठाक 32-24-34 के फिगर की कम बोलने वाली लड़की थी.

उम्र के साथ भाविका के रूप और चाहने वाले भी बढ़ते जा रहे थे.
जब वह स्कूल जाने के लिए निकलती, तब कई लड़के उसकी चाल और रसीला बदन देख कर आकर्षित हो जाते थे.
कई तो उसके ख्यालों में मुठ मार लिया करते थे.

बहुत से मर्द भी उसे देखकर बस उसके साथ सोने के ख्वाब मन ही मन देखते थे.

लोगों की प्यासी नजरों से खुद की उम्र के इस बदलाव को भाविका भी महसूस करती थी.
लेकिन पूरी तरह से समझ नहीं पाती थी.

उसने इस बारे में पूजा से पूछा.
पूजा समझदार थी, वह उसकी बातों को बहाने बना कर या मजाक में टाल देती थी.

लेकिन भाविका जानने को बेकरार थी.

भाविका ने यह बात एक बार विक्रम से पूछने का तय किया क्योंकि विक्रम मजाकिया स्वभाव का था, गुस्सा नहीं करता था.

विक्रम शाम को रास्ते में भाविका से मिला.
तब उसे ‘तुमसे कुछ काम है …’ ऐसा कहकर भाविका ने रोक लिया.

विक्रम सोचने लगा कि इसे क्या काम होगा!

सहमी सी आवाज़ में भाविका ने विक्रम से कहा- वादा करो, मुझे सच बताओगे और मजाक नहीं करोगे.
विक्रम ने कहा- ठीक है, मैं मज़ाक नहीं करूंगा.

भाविका ने पूछा- कई लड़के मुझे देखकर रास्ते में आपस में कानाफूसी करते हैं कि क्या माल है यार … हाथ लगे तो वारे न्यारे हो जाएं. इसका क्या मतलब हुआ, मैं कोई चीज़ हूं क्या?
विक्रम बीच रास्ते में भाविका की इस बात का क्या जवाब दे … और सच मानो तो वो अचानक से ऐसे हुए सवाल से एकदम भौचक्का रह गया था.

हालांकि कोई आस-पास नहीं था, फिर भी विक्रम ने भाविका से यह सवाल पूजा से करने को कहा.
यह सुनकर भाविका ने ग़ुस्से में आते हुए और वादा याद दिलाते हुए कहा- तुम भी मुँह मोड़ लोगे, तो मेरा क्या होगा?
तब विक्रम ने भाविका से कहा- ऐसी बातें रास्ते में नहीं करते पागल!

भाविका ने विक्रम से कहा- तो ऐसी बातें कहां करते हैं?
विक्रम ने कहा- अकेले में.
तब भाविका ने कहा- ठीक है.

विक्रम ने कहा- मैं तुम्हें मौका देखकर घर बुलाऊंगा लेकिन तुम्हें मुझ पर यकीन करना पड़ेगा.
भाविका ने कहा- ठीक है.

अलग होने के बाद विक्रम घर जाकर भाविका के ख्यालों में खो सा गया.
वह सोचने लगा कि कमाल का मौका मिला है. यदि सब ठीक रहा तो भाविका को पटाकर सेक्स करूँगा.

रात को ख्यालों में भाविका के खूबसूरत बदन को प्यार करने का मौका देखकर वो कुछ ज्यादा ही तरसने लगा.
मगर भाविका को कैसे पाया जाए, यह एक समस्या थी.
अधिकतर समय कोई न कोई आस पास रहता ही था.

भाविका जैसी सीलपैक माल की चुदाई के लिए कम से कम तीन घंटे का समय चाहिए था.
उतने समय तक कोई आस पास न रहे, ऐसा मौका मिलना जरूरी था.

कुछ दिन बाद रविवार आया.

तब शहर में शॉपिंग करने के लिए घर के बड़े लोग बात करने लगे.
सभी ने शाम 5 बजे निकलने का तय किया.

विक्रम के मम्मी पापा भी घर में यह बात कर रहे थे.
तो विक्रम का दिमाग दौड़ा.

भाविका के भाई दीपेन से वो उसके घर पर मिला और पूछा- आज शाम को क्या प्रोग्राम है?
तब दीपेन ने विनय औऱ वरुण को फोन करके पूछा.

सबके बीच में मूवी देखने का प्लान बना और वो सब शाम 6 बजे के शो के लिए राजी हो गए.
भाविका ये सारा प्लान कमरे में से सुन रही थी कि दीपेन भैया ने और विक्रम ने हॉल में से दोस्तों के साथ मूवी देखने जाने की फोन पर बात की है.

शाम को 5 बजे सारे शॉपिंग करने के लिए चले गए, जिसमें सब दोस्तों के मम्मी पापा भी गए थे.
बाद में विक्रम को दोस्तों ने 05:30 बजे मूवी देखने के लिए बुलाया, तब विक्रम ने पेट दर्द का बहाना करके मूवी देखना टाल दिया.

दोस्तों के चले जाने के बाद उसने भाविका के घर फोन किया और उसे अपने वादे की बात याद दिलाकर कहा कि मेरे घर आ जाओ.
उसने इसी के साथ एक अपना वादा भी भाविका से करवा लिया- तुम्हें भी मेरी मांग पूरी करनी होगी.

भाविका ने उत्सुकता में विक्रम की मांग पूरी करने की बात मान ली.

तब भाविका विक्रम के घर मुस्कुराती हुई पहुंची.
विक्रम उसका सोफे पर बैठे बैठे ही इंतजार कर रहा था.

वह भाविका को अपने ऊपर वाले बेडरूम में ले गया.
वहां भाविका ने विक्रम से फिर से लड़के लड़कियों के संबंध के बारे में पूछना शुरू कर दिया.

विक्रम आराम से बैठा हुआ था.
उसने कहा- अब किस बात की जल्दी है, आराम से बैठो … तसल्ली से बात करते हैं.

भाविका ने उस समय सफेद रंग की फ्रॉक पहनी थी जिसमें उसका ख़ूबसूरत बदन दिख रहा था.

अकेले में विक्रम की नज़र भाविका से हट ही नहीं रही थी.
उसने उठकर भाविका के गाल पर मजाक में ही किस कर दी.

तो भाविका बोली- ये क्या कर रहे हो?
तब विक्रम ने उसकी खूबसूरती के आकर्षण की तारीफ करते हुए कहा- तुम आज इतनी प्यारी लग रही हो कि मुझे तुम पर थोड़ा प्यार आ गया.

भाविका सुनकर नतमस्तक होकर शर्मा गई और थोड़ा सा हंस दी.
फिर विक्रम ने बताया कि सेक्स का उपयोग लोग मजे के लिए और संतान उत्पत्ति के लिए करते हैं.

विक्रम ने भाविका को तफ़सील से मर्द और औरत के जिस्म की जानकारी दी कि कौन से अंग का क्या उपयोग है.
औरत और मर्द के बीच आकर्षण के विज्ञान को समझाया.

भाविका विक्रम की बातें बड़े गौर से सुन और समझ रही थी.
अब विक्रम ने आईने की ओर इशारा करते हुए भाविका को खड़ा रह कर अपने आपको देखने को कहा.

भाविका आईने के सामने आकर खुद को देखने लगी.
वो कुछ बोले, उसके पहले ही विक्रम उसके पीछे खड़ा हो गया और अपने हाथ को भाविका की कमर में लिपटा दिया.

दूसरे हाथ से भाविका के बाल में लगे बक्कल को निकाल दिया जिससे उसके बाल खुल गए.
भाविका के लंबे बाल उसके पिछवाड़े तक लहरा रहे थे.

विक्रम ने अपने होंठों को पीछे से ही भाविका के गालों पर दबा दिया और गाल से गाल को थोड़ा सहलाया.

भाविका को ऐसा अनुभव कभी नहीं हुआ था.
वह शर्म के मारे कुछ समझ नहीं पाई कि क्या करे … क्या ना करे.

उसने अपनी कमर से विक्रम के हाथ को छुड़ाया और गांड को पीछे से ही धक्का देते हुए कहा- चल दूर हट मुझसे!

भाविका नत मस्तक होकर पैर के अंगूठे को मोड़कर फर्श पर घिसने लगी.
उसके चेहरे पर शर्म की रेखाएं दिखने लगीं.
विक्रम उसे देख रहा था.

अब विक्रम का मन उस पर आ गया था, भाविका के बर्ताव से उसका लंड खड़ा हो गया था.

वह भाविका के नजदीक जाना चाहता था.

भाविका ने उसके लंड के बदलाव को पैंट के ऊपर से ही देख लिया था.
तभी भाविका ने विक्रम से जानकारी देने के लिए शुक्रिया कहा और जाने लगी.

पर विक्रम ने भाविका का हाथ पकड़ते हुए कहा- मैंने अपना वादा पूरा किया, तुम्हें सब समझा दिया, जो तुम जानना चाहती थी. अब मेरा वादा भी तुम याद करो.

भाविका समझ चुकी थी कि विक्रम उसे पाना चाहता है, प्यार करना चाहता है.
अब भाविका वादे के हिसाब से पीछे भी नहीं हट सकती थी.

विक्रम ने कहा- मैं तुम्हें काफी पसंद करता हूँ औऱ तुम्हारे साथ सेक्स करना चाहता हूँ.
भाविका ने सिर झुकाकर हां कह दिया.

विक्रम ने खुशी से भाविका को खींच कर अपनी बांहों में भर लिया. उसे गालों से लेकर, गर्दन तक चूमने लगा.
भाविका भी धीरे धीरे लंबी सांस भरने लगी.

तभी विक्रम ने उसकी गांड को सहलाया और हाथों से मुँह पकड़ कर सीधा होंठों पर किस जड़ दिया.

फ्रॉक को उठाकर सर के रास्ते निकाल दिया और ब्रा पैंटी के ऊपर से ही चूत और बूब्स को सहलाने दबाने लगा.

भाविका ने विक्रम के लंड को पैंट के ऊपर से ही सहला दिया.
वो टी-शर्ट औऱ पैंट को उतारने लगी.

अब दोनों अंडरगार्मेंट्स में थे.

विक्रम ब्रा के हुक खोलकर बूब्स से खेलने लगा, चूसने लगा.
भाविका के बूब्स खूबसूरत थे और निप्पल गुलाबी रंग के थे.

तब भाविका विक्रम के कहने पर उसकी चड्डी निकाल कर उसके लंड को मुठ मारने लगी.
इससे विक्रम जोश में आ गया और उसने भाविका की पैंटी उतार दी.

भाविका की चूत पर हल्के हल्के झांट के बाल थे.
उसके मुलायम गोरे नंगे बदन को देखकर विक्रम पागल ही हो गया था.
दोनों के लंड और चूत से पानी निकल रहा था.

विक्रम ने भाविका को बिस्तर पर लेटाया और लंड का अगला हिस्सा चूत में रगड़ने लगा.
भाविका नशे से मदहोश होने लगी.

भाविका की चूत का पर्दा अभी तक टूटा नहीं था.
विक्रम ने धीरे से लंड डाला.
लंड चूत की सील वाली झिल्ली से टकराया तो भाविका को दर्द हुआ.

लेकिन विक्रम रुका नहीं.
उसने अपने 5 इंच के लंड को जोरदार झटका लगाया.
परदा टूट गया और आधा लंड अन्दर चला गया.

चूत से खून बहने लगा और भाविका दर्द से ‘आह … आह …’ की आवाज में कराहने लगी.
वह चुदाई के लिए मना करने लगी और अपने हाथों को विकर के कंधों पर रखकर उसको हटाने की कोशिश करने लगी.

विक्रम ने भाविका के हाथों को पकड़कर बिस्तर पर दबोच दिए और होंठों पर किस करने लगा.

हालांकि घर पर कोई नहीं था तो फिक्र नहीं थी.

कुछ देर विक्रम भाविका के ऊपर यूँ ही लेटा रहा.

शांत होने के बाद उसने फिर से जोरदार झटके से पूरा लंड चूत में घुसा दिया.

दर्द से भाविका के मुँह से आवाज निकलने लगी- उई मां मर गई ऊई … नहीं … बस करो.
विक्रम छोड़ने को तैयार नहीं था, वह भाविका के ऊपर लेटा रहा.

भाविका के शान्त होने पर वो लंड धीरे धीरे हिलाने लगा तो भाविका भी गांड उठाकर हिलने लगी.

विक्रम होंठों को किस करता गया, बूब्स चूसता गया और धीरे धीरे झटकों से सेक्स का मजा लेता गया.

करीबन 20 मिनट में दोनों झड़ने वाले हो गए थे.
तभी विक्रम ने लंड चूत से बाहर निकाला और मुठ मारकर बाहर झड़ गया.

वीर्य की धारा से भाविका की जांघें गीली हो गईं.
वे दोनों उठकर बाथरूम में गए और एक दूसरे को नहला कर साफ किया, बदन पौंछा और कपड़े पहन लिए.

भाविका ने कहा- मैंने भी तुम्हें वादे के मुताबिक बात मानकर संतुष्ट कर दिया.
क्यूट गर्ल देसी चुदाई के बाद दोनों एक दूसरे को बांहों में भर के मुस्कुराये … और लंबा किस किया.

उसके बाद भाविका घर चली गई.
तब तक सारे लोग वापस आ गए थे और रात 10 बजे मूवी देखकर सब दोस्त भी वापस आ गए.

मौका मिलने पर भाविका और विक्रम सेक्स के मजे ले लिया करते थे.

दोस्तो, क्यूट गर्ल देसी चुदाई कहानी कैसी लगी, मुझे ईमेल पर जरूर बताएं.
[email protected]

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