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कच्छी फाड़ चुदाई- 1

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कॉलेज गर्ल सेक्स डिजायर को इस कहानी में अच्छे से बताया गया है. मध्यम वर्गीय परिवार की कमसिन जवान लड़की ने अपने बॉयफ्रेंड के सेक्स प्रोपज़ल को ठुकरा दिया. पर …

नमस्कार दोस्तो, मैं वीनस फिर से हाज़िर हूं एक जबरदस्त चुदाई की कहानी लेकर!
मेरी कहानियों को आप सभी ने बहुत प्यार दिया.
उसके लिए तहे दिल से शुक्रिया।

मेरी पिछली कहानी थी: होली, चोली और हमजोली

अब चलते हैं इस कहानी की नायिका की ओर!

देखने में साधारण सी, एक मध्य स्तरीय परिवार में पली बड़ी कॉलेज गर्ल की सेक्स डिजायर की कहानी है यह!
पायल एक बेहद अच्छे परिवार से है, उसे उसके माता पिता बेहद प्यार करते हैं।

वह एक रूढ़िवादी परिवार में पली बढ़ी, उसे सिखाया गया था कि लड़कों के साथ स्वच्छन्द होना अनुचित है.
यह बात उन दिनों की है जब पायल ने अपना पहला कदम जवानी की दहलीज पर रखा था।

उसका एक बॉयफ्रेंड पहले स्कूल में रह चुका था पर सेक्स के लिए मना करने पर दोनों का ब्रेकअप हो गया।

हालांकि पायल भी उन सभी लड़कियों में से एक थी जिसे एक साथी प्यार के लिए सेक्स चुदाई के लिए चाहिए था लेकिन परिवार समाज प्रदत्त संस्कारों में बंधी पायल अपने बॉयफ्रेंड के सेक्स प्रोपज़ल को स्वीकार ना कर पाई, उसने अपनी वासना का दमन करके मना कर दिया था.

लेकिन इस ब्रेकअप से पायल का दिल बिखर गया, अब जब भी उसे कोई लड़का प्यार का इज़हार करता, पायल को उसकी आंखों में सिर्फ वासना ही छिपी दिखती, प्यार का दोशाला ओढ़े कई लड़के पायल को बिस्तर तक ले जाने को आतुर थे।
आखिर कमसिन जवान अनछुई लड़की को कौन चोदना नहीं चाहेगा।

परन्तु पायल अभी भी संस्कारों की जंजीरें तोड़ने में खुद को अक्षम पा रही थी.

अपना टूटा दिल समेटे वो जिंदगी खाली और अकेली जीए जा रही थी।

इस तरह समय बीतता गया … पायल ने अपनी आजादी और अकेलेपन से दोस्ती कर ली।
लेकिन जवानी की मांग को वह कुंवारी लड़की कब तक नकार सकती थी, उसने अश्लील साहित्य का सहारा लिया.

आजकल इंटरनेट पर सब कुछ कितनी आसानी से मिल जाता है, इसी का उदाहरण है कि … इसी एकाकी अंतराल में पायल ने पोर्न से सब कुछ सीख लिया।
चूत और उसका गीलापन किस तरह गर्मी को बढ़ाता है, और चुदने की तलब कैसे अपने आप हाथों को कच्छी तक ले आती है।

पायल अब 20 की हो चली थी, अब उस कॉलेज गर्ल सेक्स डिजायर पूर्ण रूप से लंड मांगने लगी थी. और दिन में तीन चार बार ‘अपना हाथ जगन्नाथ’ करना, उसके लिए एक आम बात थी।

अब उसका मन विद्रोही हो चला था, उसने ठान लिया था कि वो कुछ तो करके रहेगी.

एक दिन वो कॉलेज के पुस्तकालय के एक कोने में ‘इस्मत चुग़ताई’ की किताब पढ़ते पढ़ते आपा खोकर अपनी जींस की जिप खोल अपने आपको सहलाने लगी।
उसका वासना से खुला मुंह, शायद जैसे लंड चूसने को तरस रहा हो।
और आंखों में अपना जिस्म खुद भोगने का नशा।

उसने कुर्सी पर टांगें चौड़ी कर ली, और अपनी हाथों की दो उंगलियां अपनी भीगी चूत के रस में डूबो के अपनी चूत को मसलने लगी.
पुस्तकालय की सन्नाटे में उसकी तेज होती फूलती सांसें कोई भी सुन सकता था।

पायल ने पानी भीगी, रस से भरी उंगलियां अपने मुंह में डाली, अपनी चूत की खट्टे नमकीन स्वाद को चखकर वो और उत्तेजित हुई, अपनी लार से गीली उंगलियों को अपनी कुर्ती में डाल अपने चूचुकों को मसलने लगी।
उसके एक हाथ में किताब और दूसरे में उसके चूचुक।

दोस्तो, आप खुद ही सोचिए, आपके सामने यदि पायल होती, तो क्या आप उसकी आग ठंडी किए बगैर रह पाते?
सामने एक कुर्सी पर जींस की जिप खोले, चूत दिखाती हुई, और अपने चूचों से साथ खेलती हुई … जिस्म की आग में तपती हुई … सुर्ख लाल गाल और स्वर्ण सा चमकता जिस्म, आंखों में लंड की लालसा, और दिल में लड़कों के लिए नफरत!

उसे लड़के तो क्या, लेस्बियन लड़कियां भी चोदने से ना कतराती।

खैर … कुछ वक्त बाद अपनी विलासी तंद्रा से बाहर आने पर उसे अहसास हुआ कि वो पुस्तकालय में है।

अब यह किताब घर जाकर ही पूरी करनी होगी, नहीं तो कॉलेज में कोई देख सकता है!

ये सोच, किताब अपने हाथ में लिए उसने कपड़े ठीक किए और पुस्तकालय के अध्यक्ष के कमरे की तरफ चल दी।
अध्यक्ष जी की ओर किताब पेश कर उसने कहा- यह किताब घर के लिए इश्यू कर दीजिए सर!

पुस्तकालय के अध्यक्ष, प्रकाश प्रवीण करीब 37-40 वर्षीय रहे होंगे।
उन्होंने पायल को ऊपर से नीचे तक देखा- हम्म्म, अच्छा तो तुम इस्मत चुगताई की किताब पढ़ रही थी.. देखो, किताब खराब नहीं होनी चाहिए, और अगली बार बिना आवाज के करोगी तो बेहतर होगा, मुझे शोर करने वाले लोग पसंद नहीं!

प्रकाश एक बेहद तंदरुस्त और बलिष्ठ शरीर के धनी हैं, उनकी आवाज़ में गरज है और बड़ी बड़ी आंखें, बोलने के लहजे में हरयाणवी और हिंदी भाषा का मेल!
और कंप्यूटर पर काम करने से कतराने वाले लोगो में से एक!

पायल शरमा के बोली- सॉरी सर, आगे से नहीं होगा!

पर वो इस बात पर हैरान थी कि जब सर जानते थे कि वो अपनी तृप्ति में डूबी है तो उन्होंने उसका हाथ क्यों नहीं बंटाया।
जैसे सर की देख कर की अनदेखी पायल को भा गई।

जिसके बारे में पायल ने कभी सोचा तक नहीं, यहां तक की कभी एक नजर ठीक से देखा भी नहीं, अब पायल उनके बारे में सोचने लगी थी।
शायद, सर बाकी लड़कों की तरह, जिस्म के भूखे ना हों।

अब जब जब जिस्म की आग भड़कती तो वह हस्तमैथुन की ओर चल देती।

यूं ही सिलसिला चलता रहा, प्रकाश और पायल, आंखों आंखों में एक दूसरे को देखते और अपने अपने काम में लग जाते।
बात आगे कुछ बढ़ नहीं पा रही थी और पायल की अतृप्त प्यास बढ़ती ही जा रही थी।

उसके मन में अजीब अजीब ख्याल आने लगे थे, जिसमें वो प्रकाश के बारे में सोच कर अपने जिस्म को टटोलती।
कभी कभी आग जब हद से ज्यादा पार हो जाती तो उसके मन में इच्छा होती कि सड़क पर नंगी खड़ी हो जाऊं और आते जाते हर मर्द से चुदूं।

ऐसे अशोभनीय इच्छा पर नियंत्रण रखना अनिवार्य था।
ऐसे में उसने तय किया कि वो प्रकाश पर डोरे डालेगी।

अगले दिन जब सुबह 11 बजे पायल का एक लेक्चर कैंसल हुआ तो वह तुरंत लाइब्रेरी की ओर चल निकली.

वहां पहुंची तो काफी छात्र शांति से बैठे अपनी किताबों में नजर गड़ाए बैठे थे।
कहीं कहीं फुसफुसाहट की आवाजें आ रही थी।

लाइब्रेरी प्यार करने वालों के लिए एक उत्तम अड्डा होता है।
चुपके से साथ बैठी अपनी प्रेमिका के कपड़ों में हाथ डाल कर पढ़ाई का बहाना कर और किताब से मुंह छिपा कर, कामुक हरकतें करना लाइब्रेरी की किताबें और दीवारें इस सबकी गवाह थी।

पर किताबें और दीवारें बोलती कहां हैं, इसीलिए प्रेमी जोड़ों के लिए ये एक उत्तम जगह मानी गई है।

पायल ने भी कई बार, लाइब्रेरी के अंतिम छोर पर दीवार से खुद को टिका कर उंगली की है।
जहां कोई नहीं फटकता … और कोई फटकता भी है तो जोड़े आपस में ही चूमा चाटी, चिपका चिपकी में लगे रहते।

पायल ने तो कई जोड़ों को लाइब्रेरी में चुदाई करते भी देखा था।

खैर, अंदर आते ही लाइब्रेरी के अध्यक्ष प्रकाश, जो सामने लगी टेबल पर अपने कंप्यूटर से झुंझलाए हुए काम कर रहे थे, उन्होंने कहा- किताबें आज इश्यू नहीं होंगी. मेरे कंप्यूटर को जाने क्या हो गया है।
पायल ने कोई मौका न गंवाते हुए … प्रकाश की मेज़ के पास जाकर आराम से पूछा- क्या हुआ सर, खराब हो गया? मैं देखूं एक बार?
प्रकाश- हम्मम … इस्मत चुगताई वाली … देखो तो ज़रा!

पायल को अच्छा लगा कि वो प्रकाश को अब भी याद थी।

मेज़ के दूसरी ओर आकर पायल प्रकाश से इस तरह सट कर खड़ी हुई कि कुर्ती के किनारे से लगे चीरे में से उसकी नंगी कमर के दर्शन प्रकाश को हो जाएं।

प्रकाश की नज़र रह रह कर पायल की कमर की ओर जाती ओर फिर सिर हिला वापिस कंप्यूटर की तरफ हो जाती।

पायल- क्या प्राब्लम हो रही है इसमें सर?
प्रकाश- बहुत स्लो हो गया है, कुछ खुल नहीं रहा।

पायल- आप भी तो स्लो हैं ना सर, इसीलिए कुछ खुल नहीं रहा!
पायल ने द्विअर्थी बात की।

“रिस्टार्ट किया आपने?”
प्रकाश- हां दो बार कर चुका हूं।
अब प्रकाश भी द्विअर्थी बात करने लगे।

पायल- तो आज एक बार और कर लें?
यह कहते हुए पायल ने कंप्यूटर रिस्टार्ट कर दिया.

प्रकाश- कितनी बार करना पड़ता है?

दोनों की द्विअर्थी बातें जारी थी.

पायल- वैसे तो एक बार में काम हो जाता है, नहीं होता तो दो तीन बार करना पड़ता है।

प्रकाश- बैटरी का प्राब्लम है क्या? ठीक से घुसी है बैटरी अंदर, देखना ज़रा!
पायल- कंप्यूटर में बैटरी कहां होती है सर, आप तो बिलकुल नादान हैं, कंप्यूटर में तो बड़ा वाला यू पी एस लगता है।

सिर्फ पायल और प्रकाश ही जानते थे कि बार कंप्यूटर की नहीं, पायल की चूत की हो रही थी।
पायल ने माउस पर पड़े प्रकाश के हाथ पर हाथ रख दिया और कंप्यूटर पर काम करने के बहाने से हिलाने लगी।

“यहां नहीं सर, यहां …” कहते हुए दूसरा हाथ पकड़ कर अपने नितंबों पर रख दिया।

खुला इशारा पाकर कर प्रकाश ने कुछ क्षण पायल के जवान चूतड़ सहलाए और हाथ वापिस खींच लिए।

“सब करके दिखाना पड़ेगा आपको, बहुत कुछ सीखना बाकी है.” पायल ने फिर द्विअर्थी बात करते हुए कहा।
और फिर सीधी खड़ी होकर बोली- लीजिए सर, चल गया।

पायल को तो बस प्रकाश की चिंगारी भड़कानी थी ताकि चाकू खरबूजे तक खुद चल कर आए!

इतना कर वो वापिस अपने कोने में जाकर किताब पढ़ने लगी और प्रकाश अपने कमरे में चले गए।

कमरे में पहुंच पायल की हरकतों से प्रकाश की मुश्किल बढ़ गई थी, तने हुए लंड को पायल के बारे में सोच कर सहलाने लगे।

पायल मन ही मन जानती थी कि प्रकाश कमरे में क्यों गए थे.
5 मिनट बाद वह भी प्रकाश के कमरे में चली गई।

अंदर घुस जब दोनों की नज़र एक दूसरे से मिली तो जैसे एक तूफान ने जन्म लिया।
दोनों कुछ नहीं बोले।

दरवाजा बंद करके पायल दरवाजे पर खड़ी रही … और अपनी कुर्ती उतार दी।
पायल को देख प्रकाश का हिलता हाथ तेज़ी से हिलने लगा।

और पायल अपनी चूचियां मसलती हुई कामुक निगाहों से प्रकाश की ओर देख रही थी, मानो पूछ रही हो कि ‘आपकी मदद करूं?’

प्रकाश में हिम्मत नहीं हुई कि वो कुर्सी से उठ, पायल को दबोच कर चोद पाते।
इसीलिए इस बार सिर्फ अधनंगी पायल को देख हिलाना ही उन्होंने ठीक समझा।

जब प्रकाश झड़ गए तो बिना कुछ बोले पायल ने अपनी कुर्ती वापिस पहनी और कुछ कहे बगैर कमरे से बाहर निकल गई।

अब प्रकाश को डर लग रहा था कि कहीं पायल कंप्लेंट ना कर दे।

कुछ दिन इसी तरह चला.
पायल मौका पाते ही प्रकाश के कमरे में जाती और अधनंगी हो कर प्रकाश को मुठ मारने पर मजबूर करती।

दो सप्ताह इसी तरह बीत गए, पायल के सब्र का बांध अब टूटने के कगार पर था।
वो किसी भी हाल में, प्रकाश को अपना बना लेना चाहती थी।

आज जब पायल मौका पाकर प्रकाश के कमरे में गई.

“आज दिनचर्या थोड़ी बदली जाए?” पायल ने प्रस्ताव रखा.
प्रकाश ने नासमझ बनते हुए प्रश्न किया- मतलब?
पायल बोली- आज आप कपड़े उतारो और मैं उंगली करूंगी.

“नहीं … ये ठीक नहीं, तुम जाओ यहां से!” प्रकाश ने डरते हुए मना किया।
“ये डायलॉग बोलने में कुछ देर नहीं कर दी आपने, ये तो दो सप्ताह पहले बोलना चाहिए था, अब आपको मेरी आदत लग गई है.” पायल ने जाल बिछाया।

प्रकाश ने फिर कहा- तुम जाओ यहां से!
पायल- नहीं तो क्या? शोर मचाएंगे? सबको बुलाएंगे? कि पायल आपकी इज्जत लूट रही है? कौन यकीन करेगा? और फिर आपकी तो शादी भी हो चुकी है, आपकी पत्नी का क्या?

अब पायल ब्लैकमेल पर उतारू थी, पर वो किसी भी तरह प्रकाश को पाना चाहती थी.
दो सप्ताह के इस हस्तमैथुन के निशब्द अनुबंध में उसने अपने आप ही प्रकाश पर अधिकार पा लिया था।

सिर्फ पायल के नंगी होने की देर थी और प्रकाश का लौड़ा खुद ब खुद पायल के जवां जिस्म को सलामी देता।
प्रकाश का लौड़ा पायल की जवानी का गुलाम बन चुका था।

“आपको मेरी चूचियां दबाने का, मसलने का, चूसने का मन नहीं करता?” कहते हुए पायल ने अपनी टॉप उतार दी- मेरी चूत चोदने की इच्छा नहीं होती?
कैसे रहते हैं आप?” कहते हुए पायल खुद अपनी चूचियां ब्रा के ऊपर से मसलने लगी।

प्रकाश- मैं एक पत्निव्रत पुरुष हूं, मेनका रंभा आई गई, पर मैंने अपना पत्निव्रत धर्म नहीं त्यागा और ना त्यागूंगा।
पायल- हम्मम ठीक है, तो फिर आज से ये सब बंद कर देते हैं।

सकपका कर पायल ने टॉप वापिस पहना और झटके से बाल झडकते हुए कमरे से बाहर निकल गई।

गुस्से से पायल आग बबूला हो रही थी कि कोई इतना फुद्दू कैसे हो सकता है कि सामने पड़ी, मुफ्त में मिल रही अनचुदी फुद्दी को मना कर दे।

उसने तीन महीने तक लाइब्रेरी की तरफ रुख नहीं किया. वो प्रकाश को अपने लिए तरसाना चाहती थी, दिखाना चाहती थी कि उसने क्या खोया।

अपनी गर्म योनि के लिए उसकी उंगलियां अच्छा काम कर रही थी, वो अपनी चूत से भली भांति वाकिफ थी कि कहां हाथ लगाने से वो दो मिनट में झड़ती और किस जगह से लंबे सुख का अनुभव कर सकती थी।

इन्ही दिनों में कई बार उसने प्रकाश के बारे में सोच उंगली की, अपने खाली बिस्तर पर प्रकाश को सोच, रात में नंगी सोती पायल जाने कितनी बार झड़ते हुए बिस्तर गीला कर देती थी।

कुछ दिन इसी तरह गुजर गए. परीक्षाएं भी नजदीक थी तो पायल पढ़ाई में भी व्यस्त हो गई.

परीक्षा खत्म हुई तो सोचा कि अब प्रकाश की परीक्षा लेने का भी वक्त हो चला है.

लाइब्रेरी के सामने से जाती पर झांक कर अंदर भी नहीं देखती.

कुछ वक्त यूंही बीत गया, प्रकाश कोई भी कदम पायल की तरफ नहीं बढ़ा रहा था.
ऐसे में तकरीबन तीन महीने बाद पायल ने फैसला किया कि आज लाइब्रेरी जाकर देखा जाए.

‘प्रकाश जी के क्या हाल हैं’ सोचते हुए पायल ने पुस्तकालय का रुख किया।
अपनी चाल में उछाल और चेहरे पर मंद मंद मुस्कान के साथ जब वो लाइब्रेरी में घुसी तो उसने प्रकाश की ओर नजर नहीं की … पर प्रकाश की नज़र जैसे पायल से चिपक गई हो।

पायल को देख प्रकाश का लंड बिना कुछ किए कड़क होने लगा।
पतलून में टांगों के बीच बढ़ते उभार के कारण, प्रकाश छिपते छिपाते अपने कमरे में चला गया।

अंदर जा उसने पायल के बारे में सोच फिर मुठ मारी जैसे पायल को गोद में बिठा उसके चूचियों को चूसते हुए चोद रहा हो, और पायल मदमस्त हुई लंड पर उछलती हुई अपनी गांड ऊपर नीचे करती चुद रही है। उसकी सिसकारियों की आवाज पूरी लाइब्रेरी में गूंज रही है। और प्रकाश एक अच्छे शिकारी की तरह अपना शिकार एंजॉय कर रहे हैं।

10 मिनट मुठ मारने के बार प्रकाश झड़ गया।
पायल से बात करने की इच्छा लिए वो लाइब्रेरी खाली होने का इंतजार करने लगा।

3 बजे तक लाइब्रेरी में सन्नाटा हो गया.
प्रकाश जानता था कि पायल उसका इंतजार कर रही होगी।

प्रकाश पीछे वाली दीवार के साथ लगे मेज़ और कुर्सी की ओर बढ़ने लगा जहां हमेशा की तरह पायल अपने आपको चरम सुख देने में व्यस्त थी।

अपना लंड पैंट की जिप से बाहर निकाल मसलते हुए वो पायल की तरफ ऐसे बढ़ रहा था जैसे आज ही पायल चुदने वाली हो।

पायल को उंगली करता देख वो भी अपना लंड बुक शेल्फ के साथ चिपक कर मसलने लगा।

“सर, मज़े भी लेने हैं पर मज़े देने नहीं है, क्यों?” पायल ने प्रकाश को रंगे हाथ पकड़ लिया।
और पास आकर उसका लंड पकड़ कर सहलाने लगी।

“सर, आप अगर मान जाते तो इसे इतना तड़पना नहीं पड़ता।” पायल प्रकाश की आंखों में देख कर तेज़ी से लंड हिला रही थी।

अपने कड़क लौड़े पर पायल के हाथ का स्पर्श पाकर अनायास ही प्रकाश के मुंह से आह निकल गई।
उसने पायल के स्पर्श का सुख अनुभव करते हुए आँखें बंद कर ली और पायल ने भी मौका ना गंवाते हुए प्रकाश के होंठों को चूम लिया।

प्रकाश अचानक हुए इस नए अहसास से हड़बड़ा कर आँखें खोल ली।
पायल अपनी चिरपरिचित मुस्कान बिखेरते हुए प्रकाश के लंड को निहारते हुए आगे पीछे कर रही थी।
उसके हाथों की चार चांदी की चूड़ियां छन छन कर रही थी।

प्रकाश ने आहें भरते हुए अपने हाथ पायल की कमर पर रख दिए।
पायल को अहसास हो चला कि प्रकाश का पानी छूटने को है, उसने प्रकाश को चरम तक पहुंचा कर हिलाना छोड़ दिया।

प्रकाश अवाक हो पायल के धोखे से परेशान और अपनी नियंत्रण रेखा के भीतर रहने के ख्याल से कुछ बोला नहीं।

पायल अपनी जवानी के घमंड में चूर बोली- मुझसे अब सुख तभी पाओगे, जब खुद मुझे सुख देने को राज़ी होगे.

खड़े लंड के साथ प्रकाश ज्यों का त्यों खड़ा रहा जैसे उसे सांप सूंघ गया, सारी बलिष्ठता जैसे बाजुओं से निकल कर पायल की हथेलियों में जा बसी।

“तुम आखिर मुझसे चाहती क्या हो?” थोड़ी हिम्मत कर प्रकाश ने पूछा।
पायल- बस एक जिस्मानी रिश्ता जो आपकी पतलून के बटन और मेरी सलवार के नाड़े के बीच रहे।

“देखो पायल, मैं इस कॉलेज में टीचर हूं, और स्टूडेंट के साथ ऐसा करने से मेरी नौकरी चली जागी.” प्रकाश ने अपने चिर परिचित हरयाणवी वाले लहजे में लाचारी भरे स्वर में कहा।
पायल- जागी तो तब, जब कोई जान्नेगा, और जो मुट्ठी मारते हो, उस से ना जागी के?

प्रकाश बिना जवाब दिए लंड अपनी पतलून में वापिस डालकर सोच में डूबे बाहर चला गया।
पायल को समझ आ गया कि यूं डराने से प्रकाश हाथ में नहीं आयेगा, अब कुछ और युक्ति लगानी होगी।

अगले दिन वो देर दोपहरी पुस्तकालय में अपनी चिरपरिचित जगह पर बैठ, आस पास बैठे बाकी छात्रों के जाने का इंतजार करने लगी।

कुछ देर में पुस्तकालय में सन्नाटा हो गया, सभी बच्चे अपने अपने घरों की ओर या सैर सपाटे पर निकल चुके थे।

आंखें बंद कर पायल ने प्रकाश को अपने सामने सोचा जैसे वो पायल को सामने खड़े देख रहे हैं और पायल अपनी कामुक मुस्कान और कमसिन जवानी से उन्हें अपनी ओर आकर्षित कर रही है।

अपने होंठों को खुद ब खुद काटते हुए, पायल अपने उरोज़ दबाने लगी।
सहसा उसके मुंह से आह निकल गई यह सोच कर कि पायल के स्तन मानो प्रकाश की हथेलियों में पिघल रहे हैं।

पायल के स्तन एक आम से आकार के, जैसे हर लड़की के उभरती जवानी में होते हैं, ना ज्यादा बड़े, ना बहुत छोटे, कड़क और सख्त … जैसे बड़े आकार के निम्बू हों … दबाते ही रस की फुहार बाहर आने को हो।

अपने चूचे दबाते दबाते, पायल की कच्छी गीली हो चली थी।
अब उसे कच्छी फाड़ चुदाई की जरूरत थी।

उसने इस बार जिप नहीं खोली बल्कि पूरी की पूरी जींस पैरों में गिरा दी और कुर्ती के किनारे से अपना हाथ चूत पर रख अपनी भभकती लार टपकाती चूत के नशे में खोने लगी।

“आह … आह … प्रकाश … आराम से आह … आआ आह्ह … दो उंगली नहीं … आह …”
वह जानती थी कि उसकी आवाज प्रकाश तक जरूर पहुंचेगी.

जब कोई हलचल नहीं हुई तो उसने जान बूझकर एक तेज सीत्कार भरी- आआ आह्ह ह्ह आआ ह्ह्ह आआ आह्ह ह्हह आआ आह्हह!
“मुझे शोर करने वाले लोग पसंद नहीं!” प्रकाश ने अपनी भारी सी आवाज़ में कहा।

पायल ने प्रकाश को अनसुना कर उंगली करना जारी रखा … और सीत्कारें भरते हुए प्रकाश के सामने रहते रहते उसकी आंखों में देख कर मजे लेने लगी।

प्रकाश- देखो, यूं रोज़ रोज़ हाथ से करने से हस्तमैथुन की आदत लग जाती है। जानती हो ना?

“कोई बॉयफ्रेंड नहीं है तुम्हारा?” कहते हुए प्रकाश पायल के सामने लगी कुर्सी पर बैठ गए।

पायल प्रकाश की आंखों में झांक कर देख रही थी, जैसे टटोल रही हो कि आगे बढ़ू या नहीं।

पायल ने अपनी रस से भीगी उंगलियों वाला हाथ प्रकाश और अपने बीच पड़ी मेज पर रख दिया और बोली- हां जैसे आपको मुझे देख मुठ मारने की आदत हो गई है?

उसकी चूत की मादक सुगंध किसी को भी पायल की ओर आकर्षित कर उसे चोदने पर मजबूर करने के लिए काफी थी।

पर प्रकाश भी बिल्कुल सख्त लौंडे के भांति बैठा रहा, उसकी नज़रें पायल की गीली मादक उंगलियों पर अटकी थी।

फिर कॉलेज में अपनी छवि साफ रखने हेतु प्रकाश क्या आगे से बढ़कर पायल के भोगे जाने की लालसा को पूरा कर पाएंगे?
इसी सोच में पायल खोई थी।

तभी प्रकाश ने पायल के हाथ पे हाथ रख उसे उसकी सोच से बाहर निकाला- मैंने पूछा, दिन में कितनी बार करती हो?
पायल- इस सवाल का उत्तर आप जानते हैं, फिर क्यों पूछ रहे हैं?
प्रकाश- इतनी गर्मी कहां से आ रही है? इतना करने की इच्छा कैसे होती है? पोर्न देखती हो?
पायल- पहले देखती थी, अब पोर्न की जरूरत महसूस नहीं होती।

प्रकाश- मतलब?
पायल- वो मैं … ..

थोड़ा हिचकती हुई धीमी आवाज में पायल बोली- अपनी सोच से उत्तेजित हो जाती हूं।
कॉलेज गर्ल सेक्स डिजायर की गुलाम हो चुकी थी.

प्रकाश- मैं समझा नहीं, क्या?? ऐसे कैसे? वो कैसे होता है?
वह जान बूझकर अनजान बनते हुए, सब पायल के मुंह से सुनना चाहते थे।

पायल- जैसे आज आप को सोच के …
आधी बात सुन बीच में पायल को टोकते हुए प्रकाश ने पूछा- मुझे सोच के क्या? तुम्हें कुछ शर्म लिहाज़ है या नहीं? मैं तुमसे उम्र में कितना बड़ा हूं!
प्रकाश ने नकली गुस्सा दिखाया।

अपना हाथ प्रकाश के हाथ पर रख पायल ने कहा- बड़े हैं तो क्या?

“मेरी शादी को 10 साल हो चुके हैं और तुम्हारी तो अभी शादी की उमर भी नहीं हुई.” प्रकाश ने अपना असमर्थ प्रयास किया।
पायल- शादी की उमर नहीं है तो क्या, सेक्स की उमर तो है। मैं 20 साल की हूं, क्या कमी है मुझमें? आपकी शादी तोड़ने को नहीं कह रही।

“और फिर मैंने तो सिर्फ सोचा था, सोचने में किसी का क्या जाता है।” पायल ने सफाई दी- वैसे आप अगर करना चाहेंगे तो मैं मना नहीं करूंगी. मैं कुंवारी हूं अब तक! और मुझे ये आजकल के मनचले लड़कों पर बिलकुल भरोसा नहीं है।

“और एक शादीशुदा आदमी पर भरोसा है?” प्रकाश ने पूछा।
“हां है, आप मुझे इस्तेमाल करने के लिए प्यार का सहारा नहीं लोगे, हमारा रिश्ता हमेशा कॉलेज की नजरो से दूर रहेगा, बंद कमरे के बीच या फिर पुस्तकालय में आपके कमरे के दरवाजे के भीतर, आपकी निजी जिंदगी में कोई दखल नहीं दूंगी, इतना भरोसा रखिए। मुझे सिर्फ एक ऐसे साथी की जरूरत है, जो मेरी आग ठंडी कर सके।”

प्रकाश- तुम आवाज लगाओ, अभी लाइन लग जायेगी बाहर तुम्हारी आग ठंडी करने के लिए, तो फिर मैं ही क्यों?
पायल- क्योंकि आपकी एक जिंदगी है, मेरी जिंदगी खराब करने से पहले आप दस बार सोचोगे, आपके पास खोने को बहुत कुछ है, इसीलिए आप कभी कुछ ऐसा नहीं करेंगे जिस से मुझपे या आप पर कोई आंच आए। ये मनचले लड़कों के पास क्या है खोने को? कल को कोई मेरी नंगी तस्वीर इंटरनेट पे डाल दे, उससे इन्हें क्या फर्क पड़ेगा?

इतना कह पायल खड़ी हो अपनी कच्छी और जींस पकड़ कर ऊपर करने लगी।
प्रकाश खड़े हुए और उन्होंने पायल का हाथ पकड़ लिया।

हल्का सा धकेल पायल को पीछे की दीवार से लगा दिया और उसे बेतहाशा चूमने लगे।
पायल की खुली चूत पर उन्होंने अपना हाथ रख दिया।

“मैंने कहा था ना, मुझे शोर करने वाले लोग पसंद नहीं!” ये कहकर उन्होंने एक हाथ पायल के मुंह पर रख दिया और अपनी एक उंगली से पायल की चूत चोदने लगे।

तड़पती पायल जैसे स्वर्ग से गुजर रही थी, उसकी आँखें बंद थी और आहें प्रकाश की हथेली के नीचे दबी।
5 मिनट के भीतर ही पायल की चूत ढेर हो गई।

झड़ने के बाद उसने प्रकाश को गले से लगा लिया- कल इसी वक्त आऊंगी. और कल हाथ नहीं … नहीं तो आदत पड़ जायेगी.” पायल ने शरारती मुस्कान बिखेरते हुए कहा।
“क्या तुम यकीन से कह सकती हो की तुम मुझे ये मौका देना चाहती हो?” प्रकाश को अपनी किस्मत पर यकीन नहीं था।

पायल- हां, आपका तजुर्बा काम आयेगा.
यह कहकर पायल अपनी मुस्कान बिखेरती जींस बंद कर चली गई और प्रकाश वहीं खड़े देखते रह गए।

प्रकाश रह रह कर, अपने हाथों से आती पायल की मादक महक को सूंघ रहे थे और जाती हुई पायल की मटकती गांड को देख अब उनका लंड खड़ा होने लगा था।

उस रात, प्रकाश ने अपने घर में अपनी पत्नी को इतना चोदा की वो सुबह उठने की हालत में नहीं थी।

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कॉलेज गर्ल सेक्स डिजायर कहानी का अगला भाग: कच्छी फाड़ चुदाई- 2

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